Last Updated Feb - 19 - 2026, 03:52 PM | Source : Fela News
अफगानिस्तान में तालिबान के नए 90 पेज के क्रिमिनल कोड पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी। आलोचकों का दावा, प्रावधान महिलाओं के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान सरकार द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानून को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 90 पन्नों के इस क्रिमिनल कोड में कई ऐसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं, जिनको लेकर मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
बताया जा रहा है कि नए कानून का उद्देश्य आपराधिक मामलों से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करना है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसमें ऐसे प्रावधान भी मौजूद हैं जो विशेष रूप से महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर असर डाल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यह कोड सामाजिक नियंत्रण को और कड़ा कर सकता है, जिससे महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी सीमित होने का खतरा बढ़ सकता है।
इस बीच विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताते हुए कहा है कि किसी भी कानूनी व्यवस्था में मानवाधिकारों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार नए कानून के कुछ हिस्सों को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या इससे महिलाओं के अधिकारों की स्थिति और कमजोर हो जाएगी। हालांकि तालिबान प्रशासन की ओर से इस संबंध में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक मानकों को लागू करने के लिए नियम बनाए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून के प्रभाव का वास्तविक आकलन उसके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रशासन का कहना है कि देश में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है, जबकि आलोचक इसे अधिकारों पर संभावित अंकुश के रूप में देख रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस नए क्रिमिनल कोड पर नजर बनाए हुए है और भविष्य में इसके प्रभाव को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है। फिलहाल यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर महिलाओं के अधिकारों और कानूनी स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा बन गया है।
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