Last Updated Feb - 18 - 2026, 01:54 PM | Source : Fela News
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां तेज हुईं। खामेनेई ने अमेरिकी युद्धपोतों को नष्ट करने की चेतावनी दी, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पास ऐसे हथियार मौजूद हैं जो अमेरिकी जंगी बेड़े को समुद्र में ही तबाह कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी अचानक बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है। स्वतंत्र फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और सैन्य निगरानी स्रोतों के मुताबिक एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान क्षेत्र की ओर बढ़ते देखे गए हैं। इनके साथ हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर भी भेजे गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना लंबे समय तक अभियान चलाने की तैयारी में है।
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर पलटवार करते हुए खामेनेई ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की। इसमें अमेरिका के बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को पानी में डूबा हुआ दिखाया गया था। तस्वीर के साथ कब्र का प्रतीक भी जोड़ा गया। खामेनेई ने लिखा कि युद्धपोत खतरनाक सैन्य उपकरण होता है, लेकिन उससे भी अधिक खतरनाक वह हथियार है जो उस जहाज को समुद्र में डुबो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस बयान के जरिए अपनी एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं की ओर संकेत दिया है। अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को ईरान बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है, जिसके जवाब में उसने सार्वजनिक तौर पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर बताया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, ओमान की मध्यस्थता से तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी हुई। ईरानी विदेश मंत्री ने वार्ता को सकारात्मक बताया और कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है। हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
इस बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
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