Last Updated Feb - 06 - 2026, 01:39 PM | Source : Fela News
बांग्लादेश में चुनाव से पहले यूनुस सरकार के मंत्रियों में हलचल तेज है। कुछ देश छोड़ने की तैयारी में हैं, तो वरिष्ठ मंत्री भारत से रिश्ते सुधारने के संकेत दे रहे
बांग्लादेश में अगले हफ्ते होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है। एक ओर जहां अंतरिम सरकार के कई मंत्री और सलाहकार चुनाव परिणाम आने से पहले देश छोड़ने की तैयारी में बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत को लेकर बयानबाजी का सुर भी अचानक नरम पड़ता दिख रहा है। यह बदलाव ऐसे समय पर सामने आया है, जब पिछले डेढ़ साल में भारत-बांग्लादेश संबंध अपने सबसे कठिन दौर से गुजरते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नोबेल पुरस्कार विजेता Muhammad Yunus की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के कुछ मंत्री राजनयिक पासपोर्ट जमा करा रहे हैं। माना जा रहा है कि ऐसा वे इसलिए कर रहे हैं ताकि चुनाव नतीजों से पहले देश से बाहर जाने में उन्हें आसानी हो। कई सलाहकारों ने कथित तौर पर वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार की ओर से किसी मंत्री का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन वित्त मामलों के सलाहकार डॉ. सालेहुद्दीन अहमद और मोहम्मद फौजुल कबीर खान के पासपोर्ट सरेंडर किए जाने की चर्चाएं तेज हैं।
इसी बीच बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार Tawhid Hussain का बयान काफी अहम माना जा रहा है। चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ रिश्तों में “झटका" लगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध पूरी तरह टूटे नहीं और चुनाव के बाद चुनी हुई सरकार इन रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश करेगी।
हुसैन ने कहा, “अंतरिम सरकार के समय भारत के साथ संबंधों में कुछ रुकावटें जरूर आईं, लेकिन वे महत्वपूर्ण बने रहे।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए छात्र आंदोलन और हिंसक प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की सरकार का तख्तापलट कर दिया गया था। इसके बाद हसीना को देश छोड़कर भारत जाना पड़ा और यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।
तख्तापलट के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में ठंडापन आ गया। राजनीतिक, व्यापारिक और रक्षा सहयोग प्रभावित हुआ, जबकि ढाका के Pakistan के साथ रिश्तों में तेजी देखी गई। यहां तक कि खेल और कूटनीति को लेकर भी पाकिस्तान समर्थक बयान सामने आए, जिससे नई दिल्ली में असहजता बढ़ी।
हुसैन से जब यह पूछा गया कि यदि भारत शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने से इनकार करता है, तो क्या भविष्य की सरकार रिश्ते सुधार पाएगी, तो उन्होंने साफ कहा- “निराश मत होइए।" उन्होंने माना कि दोनों देशों के राष्ट्रीय हित हमेशा एक जैसे नहीं होते, लेकिन कोई बड़ा संकट नहीं है।
12 फरवरी को होने वाले 13वें आम चुनाव को बांग्लादेश के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इन चुनावों से न सिर्फ देश की आंतरिक राजनीति की दिशा तय होगी, बल्कि यह भी साफ होगा कि भारत-बांग्लादेश संबंध आगे टकराव की राह पर जाएंगे या फिर नई शुरुआत होगी। चुनाव से पहले बदले सियासी सुर इस बात के संकेत दे रहे हैं कि ढाका में सत्ता संतुलन के साथ-साथ कूटनीतिक प्राथमिकताएं भी बदल सकती
यह भी पढ़े