Last Updated Apr - 11 - 2026, 03:58 PM | Source : Fela News
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ईरान को MANPADS एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है, जिससे अमेरिका-ईरान सीजफायर के बीच बीजिंग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि चीन आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी उन तीन सूत्रों के हवाले से सामने आई है, जो हालिया खुफिया आकलनों से परिचित बताए जा रहे हैं। यह दावा ऐसे समय पर सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर पहले से ही पश्चिम एशिया में तनाव और सीजफायर की स्थिति बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन जिन हथियारों की आपूर्ति कर सकता है, उनमें कंधे पर रखकर दागे जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं, जिन्हें मैनपैड्स (MANPADS) कहा जाता है। ये सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें होती हैं, जिन्हें बेहद आसानी से एक या दो सैनिक संचालित कर सकते हैं। इनका उपयोग कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के खिलाफ किया जाता है, जिससे यह सैन्य दृष्टि से काफी प्रभावी माने जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि इन हथियारों की आपूर्ति सीधे नहीं, बल्कि तीसरे देशों के माध्यम से गुप्त तरीके से की जा सकती है, ताकि इनके असली स्रोत को छिपाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचा जा सके। खुफिया आकलन में यह भी संकेत दिया गया है कि ईरान युद्धविराम की स्थिति का उपयोग अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से मजबूत करने के अवसर के रूप में कर सकता है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम हुआ है। खास बात यह है कि चीन ने इसी संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा किया था, लेकिन अब उसी पर ईरान को हथियार देने की तैयारी के आरोप लग रहे हैं, जिससे बीजिंग की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। चीनी पक्ष का कहना है कि बीजिंग ने कभी भी किसी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है। चीन ने अमेरिका से अपील की है कि वह बिना आधार के आरोप लगाना बंद करे और क्षेत्र में तनाव कम करने पर ध्यान दे।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अगर चीन इस तरह की आपूर्ति करता है तो इससे अमेरिका-चीन संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो सकता है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन दौरे पर जाने वाले हैं और उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात प्रस्तावित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस पूरे मामले में खुलकर सामने नहीं आना चाहता, लेकिन वह ईरान के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को बनाए रखना चाहता है, खासकर तेल आपूर्ति के कारण। वहीं दूसरी ओर, वह खुद को एक “रक्षात्मक सहयोगी” के रूप में पेश करके अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी बचने की कोशिश कर सकता है।
फिलहाल इस दावे ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में बड़ा तनाव पैदा कर सकता है।
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