Last Updated Apr - 11 - 2026, 10:58 AM | Source : Fela News
US Iran Ceasefire Talks In Islamabad: पाकिस्तान की मध्यस्थता में आज ईरान-अमेरिका शांति वार्ता होगी, जहां दोनों देशों के अधिकारी आमने-सामने बैठकर अपने-अपने रुख पेश करेंगे, वैश्विक तनाव के बीच सबकी नजरें इस बैठक पर टिकी हैं
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने जा रही अहम शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और कड़ा बयान दिया है। ट्रंप की इस टिप्पणी ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है और वार्ता शुरू होने से पहले ही तनाव का माहौल बना दिया है।
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि “ईरान के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, वह सिर्फ बातचीत के लिए ही जिंदा है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही घंटों बाद ईरान और अमेरिका के अधिकारी पाकिस्तान की मध्यस्थता में आमने-सामने बैठने वाले हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी साधा निशाना
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए ईरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए दुनिया को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान के पास वैश्विक व्यापार को बाधित करने का कोई वैध अधिकार नहीं है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ईरान ने सहयोग नहीं किया, तो अमेरिका खुद कदम उठाकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुलवाएगा। इससे यह साफ संकेत मिला कि अमेरिका इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है और पीछे हटने के मूड में नहीं है।
बातचीत पर भी उठाए सवाल
ट्रंप ने ईरान की नीयत पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत के दौरान कुछ और कहता है और सार्वजनिक मंचों पर कुछ और बयान देता है। उनके अनुसार, ईरान एक तरफ परमाणु हथियार छोड़ने की बात करता है, तो दूसरी तरफ यूरेनियम संवर्धन को लेकर अपने रुख में बदलाव दिखाता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का फोकस असल मुद्दों से ज्यादा प्रचार और अपनी छवि बनाने पर रहता है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
इस्लामाबाद में अहम बैठक, पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
इधर, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जहां वे ईरानी प्रतिनिधियों के साथ वार्ता में हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति व सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसे में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या बढ़ सकता है तनाव?
हालांकि, ट्रंप के हालिया बयान से यह भी संकेत मिला है कि अगर यह वार्ता सफल नहीं होती, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत पहले से तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बातचीत से तनाव कम होगा या ट्रंप की चेतावनी के बाद हालात और गंभीर हो जाएंगे।
यह भी पढ़े