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होर्मुज तनाव बढ़ा, इंटरनेट ठप का खतरा, डेटा वॉर आशंका

होर्मुज तनाव बढ़ा, इंटरनेट ठप का खतरा, डेटा वॉर आशंका

Last Updated Apr - 23 - 2026, 11:49 AM | Source : Fela News

Iran-US War: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज के नीचे इंटरनेट केबल खतरे में, खाड़ी देशों की कनेक्टिविटी प्रभावित होने की आशंका; वैश्विक डेटा ट्रैफिक पर असर का खतरा बढ़ा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी।
होर्मुज तनाव बढ़ा
होर्मुज तनाव बढ़ा

मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संकेत दिए हैं कि फारस की खाड़ी में मौजूद अंडरसी इंटरनेट केबल अब संभावित निशाने पर हो सकते हैं।

ईरानी तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तेल सप्लाई और जहाजों के लिए बेहद अहम माना जाता था, लेकिन अब खतरा समुद्र के नीचे बिछे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गया है। यहां मौजूद अंडरसी डेटा केबल बेहद संवेदनशील हैं और इनमें किसी भी तरह की बाधा पूरे क्षेत्र की इंटरनेट सेवाओं को ठप कर सकती है।

क्यों अहम है होर्मुज का समुद्री रास्ता

होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भी बेहद जरूरी है। कई बड़े सबमरीन केबल सिस्टम जैसे FALCON, AAE-1, TGN-Gulf और SEA-ME-WE इसी इलाके से गुजरते हैं। यही केबल खाड़ी देशों में इंटरनेट, बैंकिंग, क्लाउड सर्विस और कम्युनिकेशन की रीढ़ हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये सभी केबल एक ही संकरे समुद्री रास्ते में केंद्रित हैं, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश इन केबल पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में अगर एक साथ कई केबल प्रभावित होते हैं, तो बड़े पैमाने पर इंटरनेट ठप हो सकता है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे खतरे

यह खतरा सिर्फ आशंका नहीं है। 2024 और 2025 में रेड सी में कई अंडरसी केबल खराब होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे इंटरनेट स्पीड धीमी हुई और कई सेवाएं प्रभावित हुईं। इन केबल को ठीक करने में महीनों का समय लगा था।

यमन समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा ऐसे ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे यह डर और गहरा हो गया है कि भविष्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी युद्ध का अहम हिस्सा बन सकता है।

डेटा सेंटर भी बन सकते हैं टारगेट

खाड़ी देशों में खासकर UAE और बहरीन में बड़े डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एक ही क्षेत्र में केंद्रित हैं। ऐसे में किसी भी हमले या तकनीकी खराबी का असर कई देशों पर एक साथ पड़ सकता है।

हाल ही में ईरानी ड्रोन हमलों में कुछ ऐसे ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई थीं, जो क्लाउड सेवाओं से जुड़े थे। हालांकि इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे साफ संकेत मिलता है कि अब युद्ध का दायरा डिजिटल दुनिया तक फैल रहा है।

क्यों बढ़ रही वैश्विक चिंता

समुद्र के नीचे बिछे इन केबल की सुरक्षा करना बेहद मुश्किल होता है। मामूली नुकसान भी डेटा ट्रैफिक, बैंकिंग सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय संचार को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल कोई बड़ा व्यवधान सामने नहीं आया है, लेकिन इस चेतावनी ने दुनिया का ध्यान उस अदृश्य नेटवर्क की ओर खींचा है, जिस पर पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। अगर यह ढांचा प्रभावित होता है, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को झटका लग सकता है।

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