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पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है, जानिए इसके पीछे पूरा सिस्टम

पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है, जानिए इसके पीछे पूरा सिस्टम

Last Updated Feb - 16 - 2026, 03:37 PM | Source : Fela News

पासपोर्ट रैंकिंग तय करती है कि आप बिना वीजा कितने देशों में जा सकते हैं। जानें किन पैमानों, कूटनीतिक संबंधों और आर्थिक ताकत के आधार पर तय होती है पासपोर्ट की शक
पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है
पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है

दुनिया में यात्रा करने की आजादी सिर्फ पैसे या टिकट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपके पासपोर्ट की ताकत पर भी आधारित होती है। पासपोर्ट एक ऐसा आधिकारिक दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति की पहचान और नागरिकता साबित करता है, लेकिन इसके साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा और स्वतंत्रता का भी प्रतीक बन चुका है। यही वजह है कि हर साल अलग-अलग संस्थान दुनिया के देशों के पासपोर्ट की रैंकिंग जारी करते हैं, जिससे पता चलता है कि किस देश का पासपोर्ट कितना मजबूत है। 

पासपोर्ट रैंकिंग का सबसे बड़ा आधार यह होता है कि उस पासपोर्ट के धारक कितने देशों में बिना वीजा या आसान वीजा प्रक्रिया के साथ प्रवेश कर सकते हैं। अगर किसी देश के नागरिक बिना पहले से वीजा लिए सीधे यात्रा कर सकते हैं, तो यह उस पासपोर्ट की मजबूती का संकेत माना जाता है। इसी तरह, वीजा ऑन अराइवल की सुविधा भी पासपोर्ट की रैंकिंग को मजबूत बनाती है, क्योंकि इसमें यात्री को पहले से लंबी वीजा प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता । 

इसके अलावा, ई-वीजा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) जैसी डिजिटल सुविधाएं भी पासपोर्ट की ताकत को प्रभावित करती हैं। अगर किसी देश के नागरिकों को ऑनलाइन और तेज प्रक्रिया के जरिए वीजा मिल जाता है, तो यह उस देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और भरोसे को दर्शाता है। इन सभी सुविधाओं के आधार पर पासपोर्ट को अंक दिए जाते हैं और उसी के अनुसार उसकी वैश्विक रैंकिंग तय होती है। 

पासपोर्ट की रैंकिंग केवल यात्रा सुविधाओं पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि किसी देश की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता और कूटनीतिक संबंध भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिन देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और जिनके अंतरराष्ट्रीय संबंध बेहतर होते हैं, उनके नागरिकों को दूसरे देशों में आसानी से प्रवेश की अनुमति मिल जाती है। इसके विपरीत, जिन देशों में राजनीतिक अस्थिरता या सुरक्षा संबंधी चिंताएं होती हैं, उनके पासपोर्ट की रैंकिंग अपेक्षाकृत कमजोर रहती है। 

Henley Passport Index जैसे वैश्विक सूचकांक इस रैंकिंग को तैयार करने के लिए International Air Transport Association (IATA) के डेटा का उपयोग करते हैं। इसमें दुनिया के लगभग सभी पासपोर्ट और यात्रा गंतव्यों का विश्लेषण किया जाता है। जितने अधिक देशों में वीजा-फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है, पासपोर्ट की रैंकिंग उतनी ही बेहतर होती है। 

हाल के वर्षों में भारत की पासपोर्ट रैंकिंग में भी सुधार देखने को मिला है। भारतीय नागरिक अब पहले की तुलना में अधिक देशों में आसानी से यात्रा कर सकते हैं। यह सुधार भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था, बढ़ते वैश्विक प्रभाव और बेहतर कूटनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। 

कुल मिलाकर, पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज नहीं, बल्कि किसी देश की वैश्विक स्थिति, भरोसे और प्रभाव का भी प्रतीक होता है। इसकी रैंकिंग यह दिखाती है कि दुनिया में किसी देश के नागरिकों को कितनी स्वतंत्रता और सम्मान के साथ यात्रा करने का अवसर मिलता है। 

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