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Last Updated Jan - 22 - 2026, 02:58 PM | Source : Fela News
एक समय दुबई, अबू धाबी और ओमान पर भारत का प्रशासनिक असर था। जानिए कैसे ब्रिटिश दौर में भारतीय मुद्रा, कानून और पासपोर्ट चलते थे।
आज दुबई दुनिया के सबसे आधुनिक और अमीर शहरों में गिना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ दशक पहले तक इस शहर का भारत से गहरा और सीधा रिश्ता था। एक ऐसा दौर भी रहा है जब दुबई, अबू धाबी और ओमान जैसे इलाके ब्रिटिश शासन के तहत आते थे और इन पर प्रशासनिक नियंत्रण भारत के जरिए ही चलता था।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब 1950 के दशक में 'द टाइम्स' के संवाददाता डेविड होल्डन बहरीन और खाड़ी क्षेत्र पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि जहां-जहां वे गए — दुबई, अबू धाबी और ओमान – वहां ब्रिटिश भारत की मौजूदगी साफ नजर आती थी। इन इलाकों में भारतीय मुद्रा का चलन था, भारतीय प्रशासनिक नियम लागू थे और कई मामलों में भारतीय पासपोर्ट को मान्यता मिलती थी।
दरअसल, ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान भारत को प्रशासनिक केंद्र की तरह इस्तेमाल किया जाता था । खाड़ी क्षेत्र के कई हिस्सों का संचालन भारत से होता था। आज जिसे हम यूएई कहते हैं, वह तब 'ट्रूसियल स्टेट्स' के नाम से जाना जाता था और ब्रिटिश रेजिडेंट भारत के जरिए ही यहां की नीतियां तय करते थे। दुबई का दारअलसल यानी प्रशासनिक और आर्थिक जुड़ाव भारत से था ।
इतना ही नहीं, उस समय दुबई आने-जाने वाले कई लोगों के पास भारतीय पासपोर्ट हुआ करता था। व्यापार, नौकरशाही और सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय अधिकारियों की अहम भूमिका थी। यही वजह है कि दुबई और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और व्यापारिक परंपराओं का असर लंबे समय तक बना रहा।
राजनीतिक रूप से भी भारत का प्रभाव दिखता था। ओमान के सुल्तान सईद बिन तैमूर की तुलना में राजस्थान के शासकों में अधिक आधुनिक प्रशासनिक सोच देखने को मिलती थी। वहीं, पास के कुवैत जैसे राज्यों में भी हैदराबादी सेना की वर्दी में सैनिक मार्च करते दिखाई देते थे, जो भारत से ऐतिहासिक रिश्तों का प्रमाण है।
1947 में भारत की आज़ादी के बाद भी यह प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इंग्लैंड से स्वतंत्र होने के बाद भी दुबई और खाड़ी क्षेत्र में भारत से जुड़े प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे की छाप बनी रही। भारतीय व्यापारी समुदाय ने दुबई की अर्थव्यवस्था की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई, जो आज भी नजर आती है।
आज दुबई एक स्वतंत्र, वैश्विक शहर है, लेकिन इसका इतिहास बताता है कि यह भारत के प्रभाव और ब्रिटिश शासन की प्रशासनिक व्यवस्था से निकलकर आधुनिक पहचान तक पहुंचा है। यही वजह है कि दुबई और भारत के रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और प्रशासनिक विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं।
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