Last Updated May - 27 - 2026, 01:24 PM | Source : Fela News
US-Iran War: ईरान के IRGC ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि तेल संकट और बढ़ती कीमतों ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया है. संगठन ने ट्रंप पर ईरान से समझौते के लिए ‘भीख मांगने’ का आरोप लगाया.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुली धमकियों तक पहुंच गया है. ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान पर हमला जारी रहा तो उसका “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा. इसी बीच IRGC ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि बढ़ती तेल कीमतों और ऊर्जा संकट ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर भारी दबाव बना दिया है, जिसके कारण डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान से समझौते के लिए “बेबस” नजर आ रहे हैं.
IRGC उप कमांडर मोहम्मद अकबरजादेह ने ईरानी सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि तेल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. उनके मुताबिक पश्चिमी देश अभी भी ईंधन संकट और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव से पूरी तरह निपटने की स्थिति में नहीं हैं और यही ईरान की सबसे बड़ी ताकत बन रही है.
‘ईरान हर हमले का जवाब देने को तैयार’
अकबरजादेह ने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता और होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी मजबूत पकड़ दुनिया को उसकी सैन्य ताकत दिखाती है. उन्होंने कहा कि ईरानी सेना किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही चेतावनी दी कि अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई भी सैन्य कार्रवाई वॉशिंगटन के लिए “नाकामी और अपमान” साबित होगी.
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा दावा
IRGC ने यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 25 जहाज उसकी निगरानी और सुरक्षा में सुरक्षित तरीके से निकाले गए. इनमें तेल टैंकर, कंटेनर शिप और कई कारोबारी जहाज शामिल थे. संगठन ने कहा कि उसकी नौसेना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर “स्मार्ट और सख्त कंट्रोल” बनाए हुए है.
अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और हथियारबंद नौकाओं पर हमला किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने उन नौकाओं को भी निशाना बनाया जो समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़े तो दुनियाभर में ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा बढ़ सकता है.
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