Last Updated Jan - 31 - 2026, 04:53 PM | Source : Fela News
ईरान ने कहा है कि अमेरिका और उसके साथी परमाणु समझौते के बहाने उसके खिलाफ दबाव बढ़ा रहे हैं, जिससे तनाव और उभर रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम और समझौते को लेकर जारी तनाव में नई कड़वाहट सामने आई है। ईरानी नेताओं ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी परमाणु समझौते (Nuclear Deal) को केवल अपने दबाव और रणनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वास्तविक लक्ष्य ईरान की सुरक्षा क्षमताओं को सीमित करना और उसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को घटाना है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते पर बातचीत में तर्कसंगत प्रतिबंध स्वीकार न करने की स्थिति में कड़ाई और विकल्प अपनाने की चेतावनी दी है। अमेरिका ने खाड़ी में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई शर्तें रखी हैं। वहीं ईरान ने कहा है कि वह निष्पक्ष, बराबरी पर आधारित बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसकी रक्षा या बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर बातचीत नहीं करेगा।
तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि परमाणु समझौते का उद्देश्य केवल तकनीकी मुद्दों का समाधान होना चाहिए, न कि ईरान के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रमों को कमजोर करना। उन्होंने यह भी जोर दिया कि बातचीत तभी संभव है जब वह दबाव-रहित और सम्मानजनक हो। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी कहा है कि वार्ता से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं और संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।
इस बीच, प्रशासन का कहना है कि अमेरिका अभी अंतिम निर्णय नहीं ले चुका है और कूटनीतिक प्रयासों के दरवाजे खुले रखे हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना है और यह तभी संभव है जब ईरान निश्चित रूप से अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण रखे। हालांकि, ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए है और वह किसी भी तरह के हथियार विकास से इनकार करता है।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी परमाणु समझौते को एक रणनीतिक टकराव का माध्यम बना रही है। तेहरान को शक है कि अमेरिका और उसके मुख्य सहयोगी इजरायल परमाणु डील की आड़ में उसकी सैन्य और क्षेत्रीय क्षमताओं को सीमित करना चाहते हैं, जबकि अमेरिका का कहना है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।
इस बीच, माना जा रहा है कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में नहीं बढ़ती है, तो मध्य पूर्व में तनाव और उभर सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और सैन्य विकल्प को अंतिम विकल्प के तौर पर बनाए रखने का संकेत दिया है।
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