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ईरान के मिथक और ज़मीनी हकीकत: कली पुरी ने पर्दा क्यों उठाया?

ईरान के मिथक और ज़मीनी हकीकत: कली पुरी ने पर्दा क्यों उठाया?

Last Updated Feb - 27 - 2026, 03:25 PM | Source : Fela News

Ground रिपोर्ट में प्रतिबंधित देश ईरान की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और आम धारणा के बीच बड़ा फ़र्क़ दिखता है, जैसा कली पुरी ने बताया.
ईरान के मिथक और ज़मीनी हकीकत
ईरान के मिथक और ज़मीनी हकीकत

इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने तेहरान से रिपोर्टिंग के दौरान स्पष्ट किया कि दुनिया अक्सर इंटरनेशनल सैंक्शन्स से बँधे देश के बारे में गलत या एकतरफ़ा सोच रखती है. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि तेहरान के कैफ़े में कैपुचीनो, चॉकलेट चिप कुकीज़ और किताबें देखकर आम धारणा, “सैंक्शन्ड देश में ऐसा कुछ नहीं मिलेगा” — चुनौती मिलती है.

तेहरान में एक कैफ़े में बैठकर पुरी ने बताया कि वहाँ का माहौल यूरोप के कई शहरों जैसा प्रतीत होता है और ढेर सारी किताबें व कल्चर साफ़ दिखाते हैं कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी अक्सर प्रचारित स्टीरियोटाइप से अलग होती है. उन्होंने कहा, “‘कौन सोच सकता है कि हमें तेहरान में कैपुचीनो और चॉकलेट चिप कुकीज़ जैसी चीज़ें मिलेंगी?’” 

पुरी ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित देशों की आर्थिक स्थिति और आम नागरिकों की ज़िंदगी अक्सर वैसी नहीं होती जैसी बाहरी दुनिया सोचती है. वे कहती हैं कि विज़िटर दृष्टिकोण से देश की अर्थव्यवस्था और बाज़ार उतने परेशान नहीं लगते जितना कि बाहरी धारणा में दिखाया जाता है. 

इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन ने भी कहा कि ज़मीनी हकीकत अक्सर संघर्षों और महंगाई जैसी चुनौतियों के बावजूद उन तस्वीरों से अलग है जो पश्चिमी मीडिया में आमतौर पर प्रस्तुत होती है. उन्होंने बताया कि महंगाई और आर्थिक चुनौतियाँ हैं, लेकिन वे उतनी तीव्र नहीं जितनी अक्सर चित्रित की जाती हैं और रिपोर्टिंग करते समय निष्पक्ष दृष्टिकोण रखना ज़रूरी है. 

चर्चा के दौरान औरतों के अधिकारों और सामाजिक पाबंदियों पर भी सवाल उठाए गए कि क्या तेहरान में मोरल पुलिस की मौजूदगी महसूस होती है जैसी धारणा है. पुरी ने कहा कि कई महिलाएँ हिजाब या हेडस्कार्फ़ पहनती हैं और कई नहीं, जिससे ऐसा लगता है कि यह कई मामलों में चॉइस का विषय है. उन्होंने बताया कि वे खुद आज हेडस्कार्फ़ पहन रही हैं क्योंकि बाहर ठंड है, न कि किसी अन्य दबाव के कारण. 

टीम ने कहा कि तेहरान से आगे और ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की जाएगी ताकि दर्शकों को एक सैंक्शन्ड देश में जीवन की पूरी तस्वीर दिखायी जा सके, वह तस्वीर जो प्रचलित स्टिरियोटाइप से परे है. 

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