Last Updated Mar - 24 - 2026, 11:08 AM | Source : Fela News
Iranian President Pezeshkian: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने युद्धविराम प्रस्ताव के बाद सेना का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में सेना की भूमिका अहम है और सभी को एकजुट रहकर मजबूती के साथ आगे बढ़ना होगा.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का अहम बयान सामने आया है. उन्होंने देश की सेना और नागरिकों की भूमिका की सराहना करते हुए एकता और मजबूती पर जोर दिया. पेजेश्कियान ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और उन्होंने सैनिकों की बहादुरी को सलाम किया.
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि वह देश की सुरक्षा में लगे बहादुर सैनिकों के “हाथ चूमते हैं” और उन्हें राष्ट्र का सच्चा रक्षक मानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ताकत उसकी सेना और जनता की एकजुटता में है. उनके मुताबिक, देश का उज्ज्वल भविष्य और स्थिर शांति तभी संभव है जब लोग धैर्य, साहस और एकता बनाए रखें.
पेजेश्कियान ने आगे कहा कि मौजूदा हालात में देश के नागरिकों और सेना ने मिलकर जिस तरह से मजबूती दिखाई है, वह काबिले तारीफ है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इसी तरह एकजुट रहें, ताकि देश की सुरक्षा और संप्रभुता बनी रहे. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है, लेकिन साथ ही युद्धविराम की कोशिशें भी जारी हैं.
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हवाई हमला किया था. इस हमले में ईरान के कई बड़े नेताओं की मौत हो गई, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया.
संघर्ष के दौरान ईरान ने सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इस वजह से क्षेत्र में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए. हालांकि, अब कई देश इस युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं.
भारत समेत कई देश लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश में जुटे हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि मौजूदा हालात में युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि युद्धविराम की कोशिशें कितना असर दिखाती हैं.
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