Last Updated Jan - 29 - 2026, 03:01 PM | Source : Fela News
Maulana Fazlur Rehman: पाकिस्तान में पारित और प्रस्तावित पारिवारिक कानून सुधारों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
पाकिस्तान के शीर्ष धार्मिक नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में पारित पारिवारिक कानून सुधारों को खुली चुनौती देकर उन्होंने देश में नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है।
जहां पाकिस्तान सरकार बाल विवाह रोकथाम बिल 2025 और घरेलू हिंसा (रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम 2026 को लागू करने की तैयारी कर रही है, वहीं मौलाना फजलुर रहमान ने इन कानूनों का तीखा विरोध किया है। इन कानूनों का मकसद बाल विवाह पर रोक लगाना और घरेलू हिंसा के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकार को खुली चुनौती
नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने पारिवारिक कानूनों में किए गए संशोधनों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इन बदलावों को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे और सरकार के इन कानूनों को लागू करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि वह इनका विरोध करने के लिए खुलेआम उल्लंघन करेंगे।
नाबालिगों की शादी कराने की धमकी
अपने बयान में JUI-F प्रमुख ने यहां तक कहा कि वह प्रस्तावित बाल विवाह प्रतिबंध के विरोध में नाबालिग बच्चों की शादियों में खुद मदद करेंगे। उन्होंने 10, 12, 15 और 16 साल के बच्चों की शादी कराने की बात कही, जिसके बाद राजनीतिक और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
घरेलू हिंसा कानून से बढ़ा विवाद
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब संसद ने PPP सांसद शर्मिला फारूकी द्वारा पेश घरेलू हिंसा (रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम 2026 को पारित कर दिया। इस बिल का JUI-F समेत विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया। यह कानून घरों में होने वाली शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक हिंसा को अपराध की श्रेणी में रखता है।
नए कानूनों के प्रमुख प्रावधान
नए कानून के तहत पत्नी को तलाक या दूसरी शादी की धमकी देना, उसकी सहमति के बिना उसे दूसरों के साथ रहने के लिए मजबूर करना, या पत्नी, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध माना गया है। अधिनियम में 18 साल से कम उम्र के सभी लोगों को बच्चा माना गया है और इस्लामाबाद क्षेत्र में शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 साल तय की गई है।
धार्मिक आधार पर विरोध
मौलाना फजलुर रहमान ने दोनों कानूनों को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताते हुए कहा कि ये इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने मांग की कि इन बिलों को समीक्षा के लिए इस्लामिक विचारधारा परिषद को भेजा जाए और कहा कि संसद को ऐसे मामलों में कानून बनाने का अधिकार नहीं है, जिन्हें वे धार्मिक विषय मानते हैं।
यह भी पढ़े