Last Updated Feb - 04 - 2026, 04:19 PM | Source : Fela News
अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने एक इंटरव्यू में भारत की ऊर्जा नीति और संप्रभु निर्णयों पर टिप्पणी की। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की सीमित भूमिका पर चर्चा हु
अमेरिका के चर्चित पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने एक हालिया इंटरव्यू में भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर अहम बयान दिया है। कार्लसन ने कहा कि अमेरिका भारत को रूस से तेल खरीदने से नहीं रोक सकता, क्योंकि भारत अब वैश्विक स्तर पर एक संप्रभु और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा कूटनीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
इंटरव्यू के दौरान टकर कार्लसन ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है और ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना भारत की आर्थिक जरूरतों से जुड़ा हुआ है और इसे केवल राजनीतिक दबाव के नजरिये से नहीं देखा जा सकता। कार्लसन के मुताबिक, अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को यह समझना होगा कि भारत अब पुराने ढांचे में काम नहीं करता।
इस बयान के बाद सवाल उठाए जा रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध के बाद लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत द्वारा रूस से तेल आयात जारी रहने को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कैसे देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने पहले भी साफ किया है कि उसकी ऊर्जा नीति घरेलू जरूरतों, बाजार स्थितियों और उपलब्धता पर आधारित है। भारत सरकार का रुख रहा है कि वह किसी एक देश या दबाव के आधार पर अपनी नीति तय नहीं करता।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने कई मौकों पर रूस से ऊर्जा आयात कम करने की अपील की है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए संवाद के जरिए मुद्दों को सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा है कि भारत की स्थिति और उसकी जरूरतों को समझा जाता है।
इस बीच, टकर कार्लसन के बयान को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस टिप्पणी को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और बहुपक्षीय संतुलन की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस इंटरव्यू पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पहले दिए गए बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत अपनी नीतियों को लेकर बाहरी दबाव स्वीकार नहीं करता।
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