Last Updated Mar - 14 - 2026, 11:17 AM | Source : Fela News
US Marines:मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग जैसे हालात के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने 2500 मरीन सैनिकों और USS Tripoli युद्धपोत को क्षेत्र में भेजने का फैसला किया है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक करीब 2,500 मरीन सैनिकों और एक बड़े युद्धपोत को मिडिल ईस्ट की ओर भेजा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के सैनिकों और यूएसएस ट्रिपोली (एलएचए-7) युद्धपोत को इस मिशन के लिए रवाना किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि करीब 2,500 मरीन सैनिक इस तैनाती का हिस्सा होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत कोई जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया जाएगा।
मरीन यूनिट को आमतौर पर आपात स्थिति में तैनात किया जाता है। ये सैनिक दूतावासों की सुरक्षा, नागरिकों को सुरक्षित निकालने और मानवीय सहायता जैसे मिशनों में भी मदद करते हैं।
फिलहाल अमेरिकी मरीन यूनिट और यूएसएस ट्रिपोली जापान में तैनात हैं और हाल के दिनों में प्रशांत महासागर में मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार इन जहाजों को ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय लग सकता है। यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ईरान पर इजरायल और खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने के आरोप लगे हैं। इसी बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है।
इससे पहले ही अमेरिकी नौसेना के 12 जहाज अरब सागर में तैनात हैं। इनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) और आठ डिस्ट्रॉयर युद्धपोत शामिल हैं। अगर यूएसएस ट्रिपोली भी इस बेड़े में शामिल हो जाता है तो यह उस क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा अमेरिकी युद्धपोत होगा।
अमेरिका के रक्षा मंत्री ने वाशिंगटन में कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने 15,000 से ज्यादा दुश्मन ठिकानों पर हमले किए हैं। उनके अनुसार औसतन हर दिन 1,000 से अधिक हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है और अमेरिकी सेना स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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