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US President Donald Trump: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रंप की योजनाओं पर रोक लगाने से किया इनकार

US President Donald Trump: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रंप की योजनाओं पर रोक लगाने से किया इनकार

Last Updated Jun - 28 - 2025, 11:24 AM | Source : Fela News

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत दी है। अब वे अपनी वे सभी नीतियाँ फिर से लागू कर सकते हैं, जिन पर पहले कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

US President Donald Trump: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि देश की जिला अदालतें पूरे अमेरिका के लिए नीतियों पर रोक लगाने का अधिकार नहीं रखतीं। इससे न सिर्फ ट्रंप को फायदा मिला, बल्कि यह देश की संवैधानिक व्यवस्था में शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस शुरू कर सकता है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

कोर्ट ने साफ किया कि सभी नीतियों पर रोक लगाने का अधिकार एक ही जज को नहीं होना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि ट्रंप की नीतियां वैध हैं, लेकिन कोर्ट ने इतना जरूर कहा कि देशभर में लागू रोक का अधिकार सीमित होना चाहिए।

अब क्या कर सकते हैं ट्रंप?

इस फैसले के बाद ट्रंप उन नीतियों को फिर से लागू कर सकते हैं, जिन पर पहले अदालतों ने रोक लगाई थी। इनमें सबसे विवादित नीति जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने का आदेश भी शामिल है।

क्या है जन्मसिद्ध नागरिकता विवाद?

अमेरिका के संविधान का 14वां संशोधन कहता है कि अमेरिका में जन्मे हर व्यक्ति को नागरिकता मिलती है। ट्रंप इसे खत्म करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि यह कानून केवल गुलामों के बच्चों के लिए था। ट्रंप के आदेश में कहा गया था कि अगर माता-पिता अवैध तरीके से अमेरिका में हैं, तो उनके बच्चों को नागरिकता नहीं मिलेगी। पहले कई अदालतें इस आदेश को असंवैधानिक बता चुकी हैं।

विपक्ष ने जताई नाराज़गी

डेमोक्रेट नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है। सीनेट नेता चक शूमर ने इसे "तानाशाही की ओर खतरनाक कदम" बताया। उनका कहना है कि इससे ट्रंप जैसे नेता न्यायिक जवाबदेही से बच निकलेंगे और कार्यकारी शक्तियों का और दुरुपयोग कर सकते हैं।

कोर्ट में मतभेद भी दिखा

सुप्रीम कोर्ट की जज एमी कोनी बैरेट ने बहुमत की ओर से कहा कि अदालतें राष्ट्रपति की हर नीति की निगरानी नहीं कर सकतीं। लेकिन जज सोनिया सोटोमयोर ने असहमति जताते हुए लिखा कि इस फैसले से नागरिकों के अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।

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