Last Updated Feb - 10 - 2026, 02:47 PM | Source : Fela News
अमेरिका, चीन और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल चर्चा में है कि क्या परमाणु हथियार समय के साथ कमजोर हो जाते हैं या उनकी भी कोई एक्सपायरी डेट होती है।
दुनिया में जब भी अमेरिका, चीन, रूस या ईरान जैसे देशों के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव बढ़ता है, तब लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। इन्हीं में से एक अहम सवाल यह है कि क्या परमाणु हथियारों की भी कोई एक्सपायरी डेट होती है? क्या समय के साथ उनकी ताकत कम हो जाती है या वे बेकार हो जाते हैं?
विज्ञान के अनुसार, परमाणु हथियार किसी सामान्य वस्तु की तरह "एक्सपायर नहीं होते, लेकिन समय के साथ उनकी क्षमता और विश्वसनीयता जरूर प्रभावित होती है। परमाणु हथियार मुख्य रूप से रेडियोधर्मी पदार्थों जैसे प्लूटोनियम और यूरेनियम पर आधारित होते हैं। इन तत्वों में समय के साथ प्राकृतिक बदलाव होते रहते हैं, जिसे रेडियोधर्मी क्षय कहा जाता है।
परमाणु बम में इस्तेमाल होने वाला प्लूटोनियम- 239 धीरे-धीरे दूसरे तत्वों में बदलने लगता है। इस प्रक्रिया में कई साल लगते हैं, लेकिन इससे हथियार की स्थिरता और विस्फोट क्षमता पर असर पड़ सकता है। अगर समय पर इसकी मरम्मत या जांच न की जाए, तो बम अपेक्षित तरीके से काम नहीं करेगा।
इसी वजह से बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने हथियारों की नियमित जांच और रखरखाव करते हैं। इसे "न्यूक्लियर मेंटेनेंस प्रोग्राम" कहा जाता है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश अपने पुराने हथियारों को समय-समय पर अपडेट करते हैं, नए पुर्जे लगाते हैं और तकनीक को बेहतर बनाते हैं।
अमेरिका में इसे "लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम" कहा जाता है, जिसके तहत पुराने परमाणु हथियारों की उम्र बढ़ाई जाती है। इससे बिना नया परीक्षण किए भी हथियारों को प्रभावी बनाए रखा जाता है।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह गुप्त रूप से अपनी परमाणु परीक्षण साइट्स पर गतिविधियां चला रहा है। वहीं, ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय बना हुआ है। इन परिस्थितियों में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि देशों के पास मौजूद परमाणु हथियार कितने पुराने हैं और कितने प्रभावी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी परमाणु हथियार का सही तरीके से रखरखाव न किया जाए, तो वह 20 से 30 साल में कमजोर हो सकता है। इसके इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, विस्फोटक हिस्से और रेडियोधर्मी पदार्थ धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। ऐसे हथियार खतरा भी बन सकते हैं, क्योंकि वे अनियंत्रित तरीके से काम कर सकते हैं।
हालांकि, जिन देशों के पास मजबूत तकनीकी ढांचा है, वे अपने हथियारों को दशकों तक उपयोग के लायक बनाए रख सकते हैं। यही कारण है कि परमाणु शक्ति संपन्न देश इस पर अरबों डॉलर खर्च करते हैं।
वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि परमाणु हथियारों का असली खतरा उनकी उम्र नहीं, बल्कि उनका अस्तित्व ही है। जब तक ये हथियार मौजूद हैं, तब तक दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा बना रहेगा।
परमाणु हथियारों की कोई तय एक्सपायरी डेट नहीं होती, लेकिन समय के साथ उनकी क्षमता जरूर घटती है। नियमित जांच और तकनीकी सुधार से इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल के योग्य रखा जा सकता है। अमेरिका, चीन और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह विषय वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद अहम बना हुआ
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