Last Updated Jan - 27 - 2026, 05:18 PM | Source : Fela News
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। विदेशी कर्ज और देनदारियों को लेकर चर्चा तेज है कि किन देशों और संस्थाओं का कितना पैसा पाकिस्तान पर बका
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से विदेशी कर्ज के दबाव में है और हाल के वर्षों में यह बोझ लगातार बढ़ता गया है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान पर कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां सैकड़ों अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुकी हैं। इस कर्ज में विभिन्न देशों, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय बैंकों का पैसा शामिल है। आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और आयात बिल के दबाव के कारण पाकिस्तान के लिए कर्ज चुकाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा बकाया बहुपक्षीय संस्थाओं का है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे संगठन शामिल हैं। IMF से लिए गए कर्ज को लेकर हाल के महीनों में पाकिस्तान की सरकार और फंड के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। IMF का कर्ज सख्त शर्तों के साथ जुड़ा होता है, जिसके चलते पाकिस्तान को आर्थिक सुधारों और सब्सिडी कटौती जैसे कदम उठाने पड़ते हैं।
द्विपक्षीय कर्ज की बात करें तो चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेनदार माना जाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत लिए गए कर्ज और परियोजनाओं के लिए ली गई फंडिंग पाकिस्तान की कुल देनदारियों का बड़ा हिस्सा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि इन परियोजनाओं से अपेक्षित आर्थिक लाभ न मिलने की स्थिति में कर्ज चुकाने का दबाव और बढ़ सकता है।
इसके अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों का भी पाकिस्तान पर बड़ा कर्ज बकाया है। ये देश अक्सर तेल आपूर्ति में स्थगित भुगतान सुविधा और नकद जमा के जरिए पाकिस्तान को राहत देते रहे हैं। वहीं जापान और कुछ यूरोपीय देशों से भी पाकिस्तान ने विकास परियोजनाओं के लिए कर्ज लिया है, हालांकि इनकी हिस्सेदारी चीन या IMF की तुलना में कम है।
इस बीच पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह कर्ज पुनर्गठन और नए वित्तीय सहयोग के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है। प्रशासन का दावा है कि आर्थिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से धीरे-धीरे स्थिरता लाई जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निर्यात नहीं बढ़ता और घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होती, तब तक विदेशी कर्ज पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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