Header Image

टाइप 1 डायबिटीज पर बाबा रामदेव के दावे, डाइट-योग चर्चा

टाइप 1 डायबिटीज पर बाबा रामदेव के दावे, डाइट-योग चर्चा

Last Updated Jan - 19 - 2026, 05:50 PM | Source : Fela News

बाबा रामदेव ने टाइप 1 डायबिटीज में योग और खास आहार को सहायक बताया. डॉक्टरों का कहना - रोग रिवर्स नहीं होता, इंसुलिन थेरेपी अनिवार्य रहती है.
टाइप 1 डायबिटीज पर बाबा रामदेव के दावे
टाइप 1 डायबिटीज पर बाबा रामदेव के दावे

योग गुरु बाबा रामदेव ने हालिया कार्यक्रम में टाइप 1 डायबिटीज को लेकर कई अहम दावे किए हैं. उन्होंने कहा कि नियमित योग, प्राकृतिक आहार और अनुशासित जीवनशैली से इस बीमारी को "रिवर्स” करने में मदद मिल सकती है. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है, खासकर उन परिवारों के बीच जिनके बच्चे या युवा इस ऑटोइम्यून रोग से जूझ रहे हैं. 

टाइप 1 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देता है. ये कोशिकाएं इंसुलिन बनाती हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी होता है. कोशिकाएं नष्ट होने के कारण शरीर खुद इंसुलिन नहीं बना पाता और मरीज को जीवनभर बाहरी इंसुलिन लेना पड़ता है. यही वजह है कि मेडिकल साइंस टाइप 1 डायबिटीज को अभी तक "लाइलाज लेकिन नियंत्रित" बीमारी मानता है. 

बाबा रामदेव के अनुसार, कुछ विशेष योगासन जैसे कपालभाति, अनुलोम-विलोम, मंडूकासन और भुजंगासन अग्न्याशय को सक्रिय करने में मदद करते हैं. उनका कहना है कि इससे शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली मजबूत होती है और शुगर लेवल संतुलित रखने में सहयोग मिलता है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को प्रोसेस्ड फूड से दूर रहना चाहिए और हरी सब्जियां, करेला, मेथी, जामुन पाउडर और गिलोय जैसे आयुर्वेदिक तत्वों को आहार में शामिल करना चाहिए. 

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ बाबा रामदेव के "रिवर्स" वाले दावे से सहमत नहीं हैं. एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स का स्पष्ट कहना है कि टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन का उत्पादन स्थायी रूप से बंद हो जाता है, इसलिए इसे पूरी तरह ठीक या रिवर्स करना संभव नहीं है. डॉक्टरों के मुताबिक योग और संतुलित डाइट ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन ये इंसुलिन का विकल्प नहीं हैं. 

दिल्ली के वरिष्ठ हृदय एवं मधुमेह विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग ऐसे दावों से भ्रमित होकर इंसुलिन लेना बंद कर देते हैं, जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन न लेने से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है. इसलिए मरीजों को किसी भी वैकल्पिक उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. 

विशेषज्ञ यह मानते हैं कि योग तनाव कम करता है, शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारता है और इंसुलिन की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है. लेकिन वैज्ञानिक रूप से अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे टाइप 1 डायबिटीज के स्थायी इलाज या रिवर्स होने की पुष्टि होती हो. 

योग और आयुर्वेद स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जरूर हैं, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के लिए इंसुलिन ही जीवनरक्षक इलाज है. जीवनशैली सुधार सहायक हो सकता है, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं.

यह भी पढ़ें:  

कम उम्र में स्मार्टफोन बना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का खतरा

Share :

Trending this week

वर्कआउट के बावजूद बढ़ रहा वजन

Feb - 24 - 2026

कई लोग नियमित वर्कआउट करने के बावजूद वजन बढ़ने की शिकाय... Read More

हाई-प्रोटीन डाइट सच में फायदेमंद या सिर्फ ट्रेंड का असर ?

Feb - 23 - 2026

आजकल "हाई-प्रोटीन” शब्द एक ट्रेंड बन चुका है। जिम जाने ... Read More

चिप्स और कोल्ड ड्रिंक की लत तंबाकू जितनी खतरनाक

Feb - 23 - 2026

Are Ultra Processed Foods as Addictive as Tobacco: कोल्ड ड्रिंक, चिप्स और कुकीज आज कई लो... Read More