Last Updated Dec - 18 - 2025, 12:39 PM | Source : Fela News
किडनी से जुड़ी बीमारी अक्सर बिना शोर के बढ़ती है। शुरुआती संकेत नजरअंदाज हो जाएं तो समस्या गंभीर रूप ले सकती है, यही वजह है कि डॉक्टर समय रहते सतर्क रहने की सला
नेफ्रोलॉजिस्ट के मुताबिक किडनी फेल्योर के शुरुआती लक्षण आम लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें थकान या मौसम का असर समझकर टाल देते हैं। पहला संकेत लगातार थकान और कमजोरी हो सकती है, जो आराम के बाद भी ठीक नहीं होती। दूसरा, पेशाब के पैटर्न में बदलाव जैसे बार-बार पेशाब आना, रात में ज्यादा उठना या पेशाब का रंग गहरा होना। तीसरा लक्षण शरीर में सूजन है, खासकर पैरों, टखनों और चेहरे पर, जो किडनी की खराब कार्यक्षमता का इशारा हो सकता है।
इसके अलावा भूख कम लगना और मतली भी शुरुआती संकेत माने जाते हैं। कई लोगों को मुंह में धातु जैसा स्वाद या सांसों में बदबू महसूस होती है, जिसे वे गैस या दांतों की समस्या समझ लेते हैं। त्वचा में खुजली और रूखापन भी किडनी से जुड़ा लक्षण हो सकता है, क्योंकि शरीर से टॉक्सिन सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाते। सातवां अहम लक्षण है ध्यान की कमी और चक्कर आना, जो खून में विषैले तत्व बढ़ने से हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों का मतलब हर बार किडनी फेल्योर नहीं होता, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो जांच जरूरी है। बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करना, ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर या दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
नेफ्रोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि नियमित हेल्थ चेकअप और साधारण ब्लड व यूरिन टेस्ट से किडनी की स्थिति समय रहते पता चल सकती है। किडनी की बीमारी चुपचाप बढ़ती है, लेकिन थोड़ी सी सतर्कता इसे गंभीर बनने से रोक सकती है।
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