Last Updated Jan - 16 - 2026, 05:09 PM | Source : Fela News
सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज को नंगी आंखों से देखना बेहद खतरनाक हो सकता है. जानिए आंखों को नुकसान पहुंचने की वैज्ञानिक वजह और इससे बचाव के तरीके.
सूर्य ग्रहण प्रकृति की सबसे अद्भुत और रोमांचक घटनाओं में से एक है. आसमान में जब चांद धीरे-धीरे सूरज को ढकने लगता है, तो लोग उत्सुकता में उसे देखने लगते हैं. लेकिन यही उत्सुकता आंखों के लिए गंभीर खतरा भी बन सकती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि ग्रहण के दौरान सूरज आंशिक रूप से ढका होता है, इसलिए उसे देखना सुरक्षित होगा, जबकि विज्ञान इसके बिल्कुल उलट चेतावनी देता है.
ग्रहण के समय आंखों को क्यों होता है ज्यादा खतरा?
सामान्य दिनों में सूरज की तेज रोशनी इतनी चुभती है कि हमारी आंखें उसे सीधे देखने से बचती हैं. लेकिन सूर्य ग्रहण दौरान सूरज की चमक कुछ हद तक कम हो जाती है. इस वजह से आंखों का नैचुरल डिफेंस मैकेनिज्म काम नहीं करता और इंसान बिना पलक झपकाए सूरज की ओर देखने लगता है. यही सबसे बड़ा खतरा है.
क्या है सोलर रेटिनोपैथी?
ग्रहण के दौरान आंखों को होने वाले नुकसान को मेडिकल भाषा में सोलर रेटिनोपैथी कहा जाता है. यह तब होता है जब सूरज की तेज रोशनी सीधे आंख के रेटिना पर पड़ती है. रेटिना आंख के पीछे मौजूद वह संवेदनशील परत है, जो रोशनी को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर दिमाग तक भेजती है.
भले ही ग्रहण में सूरज आधा ढका दिखे, लेकिन उसकी अल्ट्रावायलेट (UV) और इंफ्रारेड किरणें पूरी ताकत से निकलती रहती हैं. ये किरणें रेटिना की कोशिकाओं में केमिकल और थर्मल रिएक्शन पैदा करती हैं, जिससे स्थायी नुकसान हो सकता है.
नुकसान तुरंत क्यों नहीं दिखता?
सोलर रेटिनोपैथी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसका असर तुरंत महसूस नहीं होता. कई बार ग्रहण देखने के कुछ घंटों या एक-दो दिन बाद धुंधला दिखना, आंखों के बीच काले धब्बे, टेढ़ी-मेढ़ी आकृतियां दिखना या रंग पहचानने में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आती हैं. कई मामलों में यह नुकसान स्थायी भी हो सकता है.
साधारण चश्मा या मोबाइल कैमरा क्यों बेकार है?
कई लोग सोचते हैं कि धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म, सीडी या मोबाइल कैमरे से देखकर ग्रहण सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है. यह एक खतरनाक भ्रम है. ये चीजें सूरज की हानिकारक किरणों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहती हैं.
सुरक्षित तरीका क्या है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य ग्रहण देखने का एकमात्र सुरक्षित तरीका ISO प्रमाणित सोलर फिल्टर या सोलर इकलिप्स ग्लासेस का इस्तेमाल है. इसके अलावा पिनहोल प्रोजेक्शन जैसी अप्रत्यक्ष विधियां भी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती हैं. इसलिए अगली बार जब सूर्य ग्रहण हो, तो उत्सुकता में आंखों से समझौता न करें. कुछ पलों का रोमांच आपकी नजर के लिए जिंदगीभर की परेशानी बन सकता है.