Last Updated Feb - 25 - 2026, 10:41 AM | Source : Fela News
महाराष्ट्र में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज है। बीजेपी बढ़त में दिख रही है, जबकि महाविकास आघाड़ी एकजुटता की कोशिश में जुटी है।
महाराष्ट्र में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। सात सीटों पर होने वाले इस चुनाव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीतियों को तेज कर दिया है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है, लेकिन विपक्ष भी मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में है।
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार बीजेपी और उसके सहयोगी दल मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी कम से कम तीन से चार सीटों पर आराम से जीत दर्ज कर सकती है। पार्टी नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मंथन कर रहा है और कोशिश है कि संगठन और गठबंधन के संतुलन को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए जाएं।
दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर गहन बातचीत चल रही है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के बीच यह तय करना आसान नहीं है कि किस दल को कितनी प्राथमिकता दी जाए। विपक्षी खेमे में यह भी चर्चा है कि अगर एकजुट रणनीति नहीं बनी तो नुकसान हो सकता है।
राजनीतिक समीकरणों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अजित पवार गुट सत्ता पक्ष के साथ है, जबकि शरद पवार गुट विपक्षी गठबंधन में शामिल है। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण किस दिशा में होगा, यह देखने वाली बात होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विपक्ष एकजुट रहता है तो कम से कम दो सीटों पर मजबूत चुनौती दे सकता है।
बीजेपी की रणनीति साफ है कि वह अपने विधायकों को एकजुट रखे और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को खत्म करे। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। पिछली बार के अनुभवों को देखते हुए इस बार कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा।
राज्यसभा चुनाव भले ही अप्रत्यक्ष मतदान से होते हों, लेकिन इनके राजनीतिक संदेश व्यापक होते हैं। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में परिणाम राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालते हैं। अगर सत्तारूढ़ गठबंधन ज्यादा सीटें जीतता है तो यह उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाला होगा। वहीं विपक्ष यदि अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करता है तो यह आगामी चुनावों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाएगा।
इस चुनाव में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में नए चेहरों को मौका देने या अनुभवी नेताओं को दोबारा भेजने का फैसला भी दलों के लिए रणनीतिक होगा । टिकट वितरण में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा जा रहा है।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी चरम पर है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के साथ तस्वीर और साफ होगी। 16 मार्च का मतदान सिर्फ सात सीटों का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह तय करेगा कि राज्य की राजनीति में किसकी पकड़ ज्यादा मजबूत है और किसे अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ेगा।
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