Last Updated Jun - 09 - 2026, 12:55 PM | Source : Fela News
कार्यकर्ता ने कहा कि आदेश के कुछ प्रावधान अधिकारियों को संरक्षण देते हैं, लेकिन यह तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है कि कार्रवाई सद्भावना से हुई या दुर्भावनापूर्ण इरादे से, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है. इसी के विरोध में 13 जून को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की गई है.
मानवीय दृष्टिकोण की मांग
‘कॉन्फ्रेंस ऑफ ह्यूमन राइट्स (इंडिया)’ ने सोमवार (8 जून, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुत्तों को हटाने के बजाय नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत किया जाना चाहिए. कार्यकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा स्थिति प्रशासनिक विफलताओं का परिणाम है, न कि “कुत्तों के आतंक” का.
आदेश के प्रावधानों पर उठे सवाल
एडवोकेट ननिता शर्मा ने कहा कि कोर्ट के आदेश में अधिकारियों को संरक्षण दिया गया है, लेकिन यह तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है कि कार्रवाई सद्भावना से हुई या दुर्भावनापूर्ण इरादे से. उन्होंने पूछा कि निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी.
शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा
दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अणु पांडे ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान लंबे समय से आवारा कुत्तों के साथ सह-अस्तित्व में रहे हैं और छात्र उनकी देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि डर फैलाने के बजाय टीकाकरण और जागरूकता जरूरी है.
वैज्ञानिक समाधान पर जोर
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से अपील की कि पशु नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और मानवीय उपाय अपनाए जाएं. उनका कहना है कि नीतिगत फैसलों में पशु कल्याण को केंद्र में रखा जाना चाहिए, ताकि संतुलित समाधान निकल सके.
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