Last Updated Jan - 30 - 2026, 05:44 PM | Source : Fela News
भारत के बजट इतिहास में कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। जानिए आज़ादी के बाद पहला बजट किसने पेश किया और कौन बना सबसे ज्यादा बार वित्त मंत्री।
भारत का आम बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की नीतियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम माध्यम है। हर साल 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट न सिर्फ सरकार की सोच दिखाता है, बल्कि आम आदमी की उम्मीदों से भी जुड़ा होता है। ऐसे में बजट के इतिहास को जानना भी उतना ही दिलचस्प है।
आज़ाद भारत का पहला बजट किसने पेश किया?
भारत को 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली, लेकिन आज़ाद भारत का पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया। यह ऐतिहासिक बजट देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी ने प्रस्तुत किया था। यह बजट ऐसे समय आया, जब देश विभाजन की त्रासदी, शरणार्थियों की समस्या और कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा था। उस बजट का मुख्य फोकस प्रशासनिक ढांचे को संभालना और नए राष्ट्र की आर्थिक नींव रखना था।
ब्रिटिश दौर में पहला बजट
भारत में बजट की परंपरा अंग्रेज़ों के शासनकाल से शुरू हुई थी। 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया था। इसका उद्देश्य 1857 की क्रांति के बाद हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करना था।
सबसे ज्यादा बार बजट किसने पेश किए?
भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए कुल 10 बजट पेश किए। यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है।
मनमोहन सिंह का योगदान
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में 5 लगातार बजट पेश किए थे। 1991 से 1995 के बीच, पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने आर्थिक सुधारों की नींव रखी, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी
पी. चिदंबरम ने कुल 9 बार बजट पेश किया। वहीं, प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री रहते हुए 8 बजट प्रस्तुत किए। प्रणब मुखर्जी का बजट अनुभव अलग-अलग दौर और परिस्थितियों से जुड़ा रहा।
निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड
वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं। वह एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री हैं। इसके साथ ही वह भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री भी हैं।
भारत का बजट इतिहास अनुभव, सुधार और बदलाव की कहानी है। हर वित्त मंत्री ने अपने समय की चुनौतियों के अनुसार फैसले लिए। आज जब बजट 2026 की तैयारी है, तो यह इतिहास हमें बताता है कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश के भविष्य की रूपरेखा होता है।
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