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दिल्ली एम्स के बाहर मरीजों और परिजनों की हालत

दिल्ली एम्स के बाहर मरीजों और परिजनों की हालत

Last Updated Jan - 23 - 2026, 04:03 PM | Source : Fela News

दिल्ली के एम्स अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजनों की परेशानियों की तस्वीर सामने आई है। ठंड, इंतजार और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली एम्स के बाहर मरीजों और परिजनों की हालत
दिल्ली एम्स के बाहर मरीजों और परिजनों की हालत

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में गिने जाने वाले दिल्ली स्थित एम्स के बाहर हालात अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों के परिजन खुले आसमान के नीचे ठंड से जूझते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सर्दी के मौसम में भी अस्पताल परिसर के बाहर रात गुजारने को मजबूर परिवारों के पास न तो पर्याप्त रैन बसेरे हैं और न ही बैठने या सोने की समुचित व्यवस्था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई परिवार कंबल, चादर या प्लास्टिक शीट के सहारे ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें कई दिनों तक इलाज का इंतजार करना पड़ता है और इस दौरान बाहर ही रहना मजबूरी बन जाती है। इस बीच छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी इन्हीं हालात में समय काटते दिखे। सवाल उठाए जा रहे हैं कि देश के शीर्ष मेडिकल संस्थान के बाहर बुनियादी सुविधाएं क्यों नदारद हैं।

वहीं दूसरी ओर, परिजनों ने यह भी बताया कि अस्पताल के भीतर सीमित जगह और नियमों के चलते सभी को अंदर रहने की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे में एक सदस्य मरीज के साथ अंदर रहता है, जबकि बाकी परिवार बाहर इंतजार करता है। बताया जा रहा है कि ठंड बढ़ने के बावजूद अस्थायी शेल्टर, शौचालय और पीने के पानी जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।

इस बीच कुछ सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों द्वारा कंबल और भोजन बांटने की कोशिशें भी की जा रही हैं। हालांकि, उनकी पहुंच सीमित बताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि यह मदद जरूरत के मुकाबले काफी कम है। वहीं दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव है और सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार, एम्स एक राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है और यहां देशभर से मरीज आते हैं। इसी कारण संसाधनों का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, यह भी कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रैन बसेरे और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विचार किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स के बाहर की यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में जमीनी चुनौतियों की ओर इशारा करती है। फिलहाल मरीजों के परिजन ठंड, अनिश्चित इंतजार और सीमित सुविधाओं के बीच इलाज की आस लगाए बैठे हैं।

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