Last Updated Jan - 24 - 2026, 02:54 PM | Source : Fela News
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर दशकों बाद भी सवाल कायम हैं। रूस से लेकर फैजाबाद तक फैली कहानियां आज भी ऐतिहासिक बहस का विषय बनी हुई हैं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर भारत में लंबे समय से रहस्य और बहस बनी हुई है। आधिकारिक तौर पर यह माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुए एक विमान हादसे में नेताजी की मृत्यु हो गई थी, लेकिन इस दावे को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर सामने आई रिपोर्ट्स, गवाहियों और वैकल्पिक सिद्धांतों ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है
सूत्रों के अनुसार, विमान हादसे की कहानी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि नेताजी का शव कभी सार्वजनिक रूप से भारत में नहीं लाया गया। जापानी अधिकारियों के बयान, चश्मदीदों की गवाही और उस समय की परिस्थितियों को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि नेताजी की अस्थियां जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी गईं, लेकिन इसे लेकर भी संदेह जताया जाता रहा है।
वहीं दूसरी ओर, एक चर्चित दावा यह भी रहा है कि नेताजी सोवियत संघ यानी रूस चले गए थे। कुछ शोधकर्ताओं और लेखकों का मानना है कि नेताजी ने विमान हादसे का नाटक किया और बाद में रूस में शरण ली। हालांकि, इस सिद्धांत के समर्थन में ठोस सरकारी दस्तावेज कभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पाए। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड्स में इस दावे की पुष्टि नहीं होती।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले रहस्यमयी साधु ‘गुमनामी बाबा’ को लेकर भी नेताजी से जुड़ी चर्चाएं सामने आईं। कहा जाता है कि गुमनामी बाबा के पास मौजूद कई वस्तुएं, पत्र और आदतें नेताजी से मेल खाती थीं। इससे यह सवाल उठाया गया कि क्या गुमनामी बाबा ही नेताजी थे। हालांकि, जांच समितियों ने इस दावे को प्रमाणित नहीं माना।
भारत सरकार द्वारा गठित कई आयोगों ने भी नेताजी की मौत की जांच की। शाह नवाज आयोग और खोसला आयोग ने विमान हादसे के सिद्धांत को सही ठहराया, जबकि मुखर्जी आयोग ने इसे खारिज किया था। इसके बाद भी सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर किसी वैकल्पिक निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।
आज भी इतिहासकारों और आम लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि नेताजी की मौत वास्तव में कैसे हुई। बताया जा रहा है कि जब तक सभी दस्तावेज और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होते, तब तक यह रहस्य पूरी तरह सुलझ पाना मुश्किल है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवन गाथा की तरह उनकी मृत्यु भी भारतीय इतिहास के सबसे जटिल अध्यायों में गिनी जाती है।
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