Last Updated Mar - 23 - 2026, 11:16 AM | Source : Fela News
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारत से सैन्य मदद मांगी है। मंत्रालय ने इसे फेक और भ्रामक बताया।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बड़े दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। इस दावे में कहा जा रहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारत से सैन्य मदद मांगी है और इसके लिए भारतीय जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। मंत्रालय ने साफ शब्दों में इसे ‘झूठा और मनगढ़ंत’ बताया है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। पोस्ट में कहा गया कि इस तरह की भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और फेक न्यूज से बचें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई है और न ही अमेरिका की ओर से ऐसी कोई मांग की गई है।
दरअसल, यह दावा एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका, भारत के साथ हुए एक समझौते के तहत पश्चिमी भारत के किसी हिस्से का इस्तेमाल कर सकता है। इस पोस्ट में कोंकण तट के पास अमेरिकी सैन्य गतिविधि की भी अटकलें लगाई गई थीं और इसे ईरान-अमेरिका तनाव से जोड़कर देखा जा रहा था।
हालांकि, सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से किसी भी विदेशी सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी जमीन या संसाधन देने की कोई बात नहीं है।
इस पूरे मामले में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट का भी जिक्र किया गया। यह समझौता 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सुविधाओं का इस्तेमाल ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए कर सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी सैन्य हमले के लिए इन सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार ने साफ किया है कि LEMOA केवल लॉजिस्टिक सहयोग तक सीमित है और इसे लेकर फैलाए जा रहे दावे भ्रामक हैं। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल खबरों को बिना पुष्टि के सच न मानें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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