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'आफत' बनकर लौट रहा अल नीनो! भारत में मौसम का बड़ा खेल

'आफत' बनकर लौट रहा अल नीनो! भारत में मौसम का बड़ा खेल

Last Updated Jun - 02 - 2026, 01:06 PM | Source : Fela News

अल नीनो की वापसी दुनिया भर में मौसम का मिजाज बिगाड़ सकती है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इसका असर मानसून, तूफानों और तापमान पर पड़ सकता है, जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा.
भारत में मौसम का बड़ा खेल
भारत में मौसम का बड़ा खेल

 

दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों की नजर एक बार फिर अल नीनो पर टिक गई है. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने चेतावनी दी है कि इस जलवायु घटना का असर आने वाले महीनों में मौसम के मिजाज को पूरी तरह बदल सकता है. जहां अटलांटिक महासागर में तूफानों की गतिविधियां सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है, वहीं दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और जंगलों में आग जैसी चरम मौसम घटनाएं बढ़ सकती हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक अटलांटिक तूफान सीजन 1 जून से 30 नवंबर तक चलता है और इस बार अल नीनो के प्रभाव के कारण तूफानी गतिविधियों के सामान्य से कम रहने की 55 प्रतिशत संभावना है. वहीं सामान्य से अधिक गतिविधि की संभावना केवल 10 प्रतिशत बताई गई है.

दरअसल, अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने की स्थिति है. यह बदलाव दुनिया भर के वर्षा चक्र और मौसम प्रणालियों को प्रभावित करता है. इसकी वजह से कई देशों में सूखा, लू, बाढ़ और तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो आमतौर पर हर 2 से 7 साल में सक्रिय होता है और इसका प्रभाव 9 से 12 महीने तक रह सकता है. इस दौरान प्रशांत महासागर का गर्म पानी पूर्वी हिस्से की ओर बढ़ने लगता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव आते हैं. इसका उल्टा प्रभाव ला नीना कहलाता है, जिसमें समुद्र का तापमान सामान्य से ठंडा हो जाता है.

अल नीनो का असर केवल महासागरों तक सीमित नहीं रहता. भारत, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और अमेजन क्षेत्र जैसे इलाकों में भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलता है. कई देशों में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.

भारत के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चिंता का विषय मानी जा रही है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के कारण इस बार गर्मी का असर लंबे समय तक बना रह सकता है. इसके अलावा मानसून कमजोर पड़ने और सामान्य से कम बारिश होने की आशंका भी जताई जा रही है.

अगर बारिश कम होती है तो इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा. फसलों की पैदावार घट सकती है, जिससे खाद्यान्न और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले से बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के बीच अल नीनो भारत के लिए नई चुनौती बनकर उभर सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि अल नीनो का प्रभाव केवल मौसम ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है.

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