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नकली अंतिम संस्कार था असली लालच की शुरुआत

नकली अंतिम संस्कार था असली लालच की शुरुआत

Last Updated Nov - 28 - 2025, 04:40 PM | Source : Fela News

हापुड़ में नकली अंतिम संस्कार का खुलासा—50 लाख बीमा ठगने की सनसनीखेज साजिश नाकाम।
नकली अंतिम संस्कार था
नकली अंतिम संस्कार था

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के ब्रजघाट घाट पर बुधवार शाम एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने लोगों के होश उड़ा दिए। चार युवक एक शव लेकर आए और दाह संस्कार करने लगे, लेकिन जैसे ही कफन हटाया गया, असली लाश नहीं, बल्कि एक प्लास्टिक का पुतला निकला। 

स्थिति देखकर स्थानीय लोगों और घाट कर्मियों को शक हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और दो युवक पकड़ लिए गए, जबकि दो मौके से फरार हो गए। गिरफ़तार आरोपियों में से एक पहले से 50 लाख रुपये के कर्ज में था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने अपने पूर्व कर्मचारी अंशुल कुमार के आधार व पैन कार्ड लेकर बिना उनकी जानकारी के उन पर 50 लाख रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। अब प्लास्टिक के पुतले को असली शव दिखाकर उसका दाह संस्कार करना चाहते थे, ताकि अंशुल की मौत का फर्जी प्रमाण बनाकर बीमा राशि हड़प सकें। 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दो युवकों,  कमल सोमानी और उसके दोस्त आशीष खुराना,  ने पुतला और दाह-सामग्री लेकर साजिश रची थी। अंशुल पूरी तरह से जीवित है और प्रयागराज में अपने घर पर मौजूद है। 

इस मामले से साफ है कि यह कोई मजाक या गलतफहमी नहीं थी, बल्कि बीमा राशि हड़पने की ठोस साजिश थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा व साजिश के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। 

यह घटना हमें याद दिलाती है कि दस्तावेज और दिखावा कभी-कभी सबसे बड़े धोखे की शुरुआत होते हैं। जिस इंसान को मर चुका दिखाना हो, उसके नाम पर ठगी करना हो,  उसके लिए प्लास्टिक का पुतला और एक घाट भी बना सकते हैं। लेकिन आनन-फानन में किसी की संवेदनाएं, धर्म या रीति-रिवाजों का दुरुपयोग करना, कानून और इंसानियत दोनों के खिलाफ है।

 

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