Last Updated Feb - 03 - 2026, 11:39 AM | Source : Fela News
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद कांग्रेस ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों, इंडस्ट्री, टैरिफ, रूस से तेल खरीद और रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर सरकार से पारदर्शिता क
भारत और अमेरिका के बीच लंबे इंतजार के बाद हुए व्यापारिक समझौते ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इस डील को आर्थिक मजबूती और वैश्विक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस डील के कई पहलू ऐसे हैं, जिनकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, और जिनका सीधा असर देश के किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और ऊर्जा नीति पर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर कहा कि ट्रेड डील की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की गई, जिससे यह संदेश जाता है कि भारत ने अपनी शर्तों के बजाय अमेरिकी दबाव में यह समझौता किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस डील के तहत भारत ने अमेरिका के लिए अपने बाजार को लगभग पूरी तरह खोलने की सहमति दे दी है, जिसमें टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को शून्य करने की बात कही जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल रूस से तेल खरीद को लेकर उठाया गया है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या इस डील की शर्तों में भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने या बंद करने की सहमति दी है ? अगर ऐसा है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए गंभीर मुद्दा बन सकता है।
कांग्रेस का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सस्ती दरों पर रूस से तेल खरीदकर अपने आयात बिल को नियंत्रित रखा है, ऐसे में इस नीति में बदलाव का असर सीधा आम नागरिक पर पड़ेगा।
कांग्रेस ने कृषि क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोला गया, तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ेगा। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कौन से ठोस प्रावधान किए हैं। साथ ही 'मेक इन इंडिया' नीति पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। अगर भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर सामान खरीदेगा, तो घरेलू उत्पादन और उद्योगों का क्या होगा?
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत 500 बिलियन डॉलर तक की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और कोयला खरीद सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत में अमेरिकी आयात पर कोई टैरिफ नहीं है, जबकि अमेरिका में भारतीय आयात पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, तो यह समझौता असंतुलित नजर आता है। उन्होंने सवाल किया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का क्या हुआ, जो अब तक भारत की विदेश और व्यापार नीति की आधारशिला रही है।
कांग्रेस की मांग है कि सरकार इस ट्रेड डील की पूरी जानकारी संसद और देश के सामने रखे। पार्टी का कहना है कि इतने बड़े समझौते पर पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि इसका प्रभाव आने वाले वर्षों तक देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और विदेश नीति पर पड़ेगा। अब निगाहें सरकार की ओर हैं कि वह इन सवालों का किस तरह जवाब देती है और डील की शर्तों को कितना सार्वजनिक करती है।
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