Last Updated Feb - 02 - 2026, 06:07 PM | Source : Fela News
लोकसभा में डोकलाम और कथित मेमोइर का हवाला देते राहुल गांधी को सरकार ने घेरा । राजनाथ सिंह ने प्रकाशन पर सवाल उठाए, स्पीकर ने नियमों का हवाला दिया, सदन में शोर ।
संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए एक कथित सैन्य मेमोइर का हवाला दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के बीच राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत एक पुस्तक से अंश पढ़ने की बात कहकर की और दावा किया कि उसमें डोकलाम क्षेत्र में चीनी गतिविधियों का उल्लेख है। उनके अनुसार, सीमा पर चीनी टैंकों की मौजूदगी और भारतीय क्षेत्र के करीब पहुंचने का जिक्र उस मेमोइर में किया गया है।
राहुल गांधी के यह कहते ही सत्ता पक्ष की बेंचों से तीखी आपत्ति उठी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तत्काल खड़े हुए और सवाल किया कि जिस पुस्तक का उल्लेख किया जा रहा है, वह आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई है। ऐसे में उसके आधार पर सदन में आरोप लगाना कैसे उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अप्रमाणित सामग्री को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाना ठीक नहीं है। इस पर सदन में शोर बढ़ गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए नियमों का हवाला दिया और राहुल गांधी से कहा कि वे स्थापित संसदीय परंपराओं का पालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में बोलने का अधिकार सभी को है, लेकिन तथ्यों और नियमों की मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। इसके बावजूद राहुल गांधी ने कहा कि वह वही पढ़ रहे हैं, जो उस मेमोइर में लिखा बताया जा रहा है, और यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे उठाना जरूरी है।
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी आपत्ति जताई और कहा कि अध्यक्ष की रूलिंग के बाद भी वही सामग्री पढ़ना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने आग्रह किया कि चर्चा तथ्यों के आधार पर हो। हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि मामला देश की सुरक्षा और सीमा से जुड़ा है, तो नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
डोकलाम का मुद्दा पहले भी भारतीय राजनीति में संवेदनशील विषय रहा है, क्योंकि यह भारत भूटान-चीन त्रिकोणीय क्षेत्र से जुड़ा है और 2017 में यहां भारत-चीन के बीच सैन्य गतिरोध भी देखा गया था। इसी पृष्ठभूमि में राहुल गांधी के बयान ने सदन का माहौल और गरमा दिया। सत्ता पक्ष का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अपुष्ट स्रोतों के हवाले से आरोप लगाना उचित नहीं, जबकि विपक्ष का तर्क था कि सरकार को ऐसे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
करीब कई मिनट तक चले इस गतिरोध के बाद अध्यक्ष ने सदन को शांत कराया और चर्चा को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि सीमा और सुरक्षा जैसे मुद्दे संसद में कितनी तीव्र राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा करते हैं। डोकलाम का जिक्र आते ही सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे, और बहस नियमों तथ्यों तथा राष्ट्रीय हित की व्याख्या के इर्द-गिर्द घूमती रही।
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