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जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह की राजनीतिक दावेदारी का खुलासा

जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह की राजनीतिक दावेदारी का खुलासा

Last Updated Jan - 28 - 2026, 04:39 PM | Source : Fela News

अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह से जुड़े नए तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने पहले भाजपा से विधानसभा टिकट की दावेदारी की थी, जिससे पूर
जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह की राजनीतिक दावेदारी का खुलासा
जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह की राजनीतिक दावेदारी का खुलासा

अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह को लेकर सामने आई नई जानकारी के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि प्रशांत सिंह ने कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी और इसके लिए पार्टी स्तर पर संपर्क भी किया था। सूत्रों के अनुसार, उनका लक्ष्य मऊ क्षेत्र से विधायक बनना था और इसी क्रम में उन्होंने राजनीतिक संभावनाएं तलाशनी शुरू की थीं।

इस बीच, मामले में तब नया मोड़ आया जब हाल की घटनाओं के बाद उनके प्रशासनिक आचरण और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को एक साथ जोड़कर देखा जाने लगा। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का सक्रिय राजनीति में जाने की तैयारी करना सेवा नियमों के अनुरूप था। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत राजनीतिक रुचि और आधिकारिक कार्यों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, प्रशांत सिंह ने अपने कुछ करीबी लोगों के माध्यम से भाजपा संगठन में यह संदेश भिजवाया था कि यदि अवसर मिले तो वह चुनावी राजनीति में उतरना चाहते हैं। हालांकि पार्टी स्तर पर इस दावेदारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई थी। वहीं दूसरी ओर, यह भी बताया जा रहा है कि टिकट को लेकर सहमति न बनने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब यह चर्चा भी हो रही है कि हालिया विवाद को केवल प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जाए या इसके पीछे राजनीतिक पृष्ठभूमि भी समझी जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी अधिकारी का नाम राजनीति से जुड़ता है, तो उसके फैसलों और गतिविधियों पर सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि बिना ठोस सबूतों के किसी अधिकारी की मंशा पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। प्रशासन की ओर से अब तक यही कहा गया है कि मामले की समीक्षा नियमों और तथ्यों के आधार पर की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच या स्पष्टीकरण के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, जिससे यह तय होगा कि पूरा मामला प्रशासनिक है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं।

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