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भारत - EU की ऐतिहासिक डील फाइनल, 97% टैरिफ खत्म, कारें सस्ती

भारत - EU की ऐतिहासिक डील फाइनल, 97% टैरिफ खत्म, कारें सस्ती

Last Updated Jan - 28 - 2026, 10:30 AM | Source : Fela News

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 18 साल बाद ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है। 97% सामानों पर टैरिफ घटा, कारों पर ड्यूटी 110% से 10% होगी।
भारत - EU की ऐतिहासिक डील फाइनल
भारत - EU की ऐतिहासिक डील फाइनल

भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच आखिरकार 18 साल से अटकी बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड डील पूरी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते का ऐलान करते हुए इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया। यह समझौता न सिर्फ भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन में भी बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भरोसे और साझेदारी का प्रतीक है। इस डील से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी, सर्विस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि इसका सीधा फायदा आम लोगों तक पहुंचेगा। 

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक सप्लाई चेन तेजी से बदल रही है और देशों के बीच भरोसेमंद व्यापारिक साझेदारियों की जरूरत बढ़ रही है। भारत और EU मिलकर वैश्विक GDP के करीब 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार के लगभग एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में यह डील रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है। 

इस फ्री ट्रेड डील के तहत यूरोपीय यूनियन के लगभग 97 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ कम या पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इससे हर साल करीब 4.75 अरब डॉलर की ड्यूटी बचत होने की उम्मीद है। सबसे बड़ा असर ऑटो सेक्टर में देखने को मिलेगा, जहां कारों पर लगने वाला टैरिफ 110 प्रतिशत से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और फॉक्सवैगन जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार और आसान हो जाएगा। 

इसके अलावा, वाइन पर लगने वाली 150 प्रतिशत ड्यूटी को भी धीरे-धीरे घटाकर 20 प्रतिशत तक किया जाएगा। पास्ता, चॉकलेट और अन्य प्रोसेस्ड फूड्स, जिन पर अभी करीब 50 प्रतिशत टैरिफ है, उन्हें पूरी तरह टैरिफ फ्री किया जाएगा। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ते और ज्यादा विकल्प मिलेंगे, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 

हालांकि, इस डील को लेकर कुछ घरेलू उद्योगों में चिंता भी है। खासकर वे सेक्टर जो अब तक ऊंचे टैरिफ के जरिए सुरक्षित थे, उन्हें बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार ने ट्रांजिशन पीरियड और सेफगार्ड्स का प्रावधान रखने के संकेत दिए हैं, ताकि घरेलू उद्योगों को एडजस्ट करने का समय मिल सके। 

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को “इतिहास रचने वाला कदम" बताया। उन्होंने कहा कि यह डील करीब दो दशकों की बातचीत के बाद संभव हो पाई है और इससे दो अरब लोगों का एक साझा फ्री ट्रेड जोन बनेगा। उनके मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले वर्षों में भारत-EU रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। 

कुल मिलाकर, भारत EU की यह 'मदर ऑफ ऑल डील्स' सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत है। आने वाले वर्षों में इसका असर निवेश, रोजगार, तकनीक और भारत की निर्यात क्षमता पर साफ दिखाई देगा। 

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