Last Updated Jan - 27 - 2026, 05:36 PM | Source : Fela News
भारत यूरोपीय संघ एफटीए पर साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा यह डील दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है रणनीतिक आर्थिक सहयोग की
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताते हुए कहा है कि यह समझौता सिर्फ एक शुरुआत है। भारत-EU शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह डील दोनों पक्षों के बीच भरोसे, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक सहयोग की मजबूत नींव रखती है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और जब ये साथ आते हैं तो इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफटीए केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल सेक्टर तक फैला हुआ है। उनके अनुसार आने वाले वर्षों में इस समझौते के जरिए दोनों पक्ष आपसी सहयोग को और गहरा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार यूरोपीय संघ इस एफटीए को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदारी के रूप में देख रहा है। उर्सुला ने कहा कि यह समझौता नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करेगा और दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए अवसर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ और भरोसेमंद बाजार है।
इस बीच उन्होंने रक्षा उत्पादन, क्लाइमेट एक्शन और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया। बताया जा रहा है कि EU भारत के साथ क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और काउंटर टैररिज्म के मुद्दों पर भी साझा समझ और समन्वय को अहम बताया गया।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर कहा कि यह एफटीए भारत के इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है और इससे किसानों, एमएसएमई, उद्योग और युवाओं को लाभ मिलेगा। दोनों नेताओं ने संकेत दिए कि भविष्य में शिक्षा, रिसर्च और लोगों के आपसी संपर्क को भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
बताया जा रहा है कि एफटीए के लागू होने की प्रक्रिया चरणबद्ध होगी और इसके प्रभाव आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे दिखेंगे। फिलहाल उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बयान को भारत-EU संबंधों में एक नए अध्याय की औपचारिक शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
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