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भारत EU एफटीए से रक्षा उत्पादन और उद्योग को बढ़ावा

भारत EU एफटीए से रक्षा उत्पादन और उद्योग को बढ़ावा

Last Updated Jan - 27 - 2026, 05:32 PM | Source : Fela News

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए सबसे बड़े एफटीए पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह समझौता किसानों से लेकर उद्योग और रक्षा क्षेत्र तक सभी के लिए लाभकारी
भारत EU एफटीए से रक्षा उत्पादन और उद्योग को बढ़ावा
भारत EU एफटीए से रक्षा उत्पादन और उद्योग को बढ़ावा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच साइन हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर सरकार ने इसके व्यापक प्रभावों को रेखांकित किया है। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रक्षा उत्पादन, काउंटर टैररिज्म सहयोग, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। प्रधानमंत्री का कहना है कि यह एफटीए भारत और EU दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद साबित होगा।

सूत्रों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत और यूरोपीय संघ के बीच टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि EU कंपनियों के लिए भारत में निवेश और व्यापार करना आसान होगा। बताया जा रहा है कि टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है।

इस बीच रक्षा उत्पादन और सुरक्षा सहयोग को भी एफटीए का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सहमति बनी है। साथ ही काउंटर टैररिज्म के मोर्चे पर सूचना साझा करने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात भी इस साझेदारी में शामिल है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इससे भारत की घरेलू रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों और एमएसएमई सेक्टर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कृषि और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में नए अवसर मिलेंगे। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सरकार का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा के लिए एफटीए में सुरक्षा प्रावधान भी रखे गए हैं।

बताया जा रहा है कि इस समझौते पर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी और विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-EU एफटीए वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। आने वाले समय में इसके वास्तविक प्रभाव जमीन पर कैसे दिखते हैं, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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