Last Updated Jan - 27 - 2026, 05:10 PM | Source : Fela News
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए एफटीए से आयात शुल्क घटेगा। इससे पास्ता, वाइन, बीयर, चॉकलेट और रसायन जैसे कई यूरोपीय उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच साइन हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद आम उपभोक्ताओं पर इसका असर धीरे-धीरे दिखने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार इस समझौते के तहत कई यूरोपीय उत्पादों पर आयात शुल्क में चरणबद्ध कटौती की जाएगी, जिससे उनकी खुदरा कीमतों में कमी आ सकती है। खास तौर पर खाद्य और पेय पदार्थों के साथ-साथ कुछ केमिकल और प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स सस्ते होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि एफटीए के दायरे में पास्ता, चीज़, चॉकलेट, ऑलिव ऑयल जैसे फूड आइटम्स के साथ बीयर और वाइन जैसी अल्कोहलिक ड्रिंक्स भी शामिल हैं। अभी इन उत्पादों पर भारत में भारी आयात शुल्क लगता है, जिसके कारण इनकी कीमतें ऊंची रहती हैं। समझौते के लागू होने के बाद शुल्क में कटौती से आयात लागत घटेगी, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
इस बीच शराब उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यूरोपीय वाइन और बीयर पर लगने वाले टैरिफ में कमी से इन उत्पादों की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि राज्य स्तर पर लगने वाले टैक्स और एक्साइज ड्यूटी के कारण कीमतों में कमी तुरंत और समान रूप से नहीं दिखेगी। सवाल उठाए जा रहे हैं कि वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह राज्यों की कर नीतियों पर भी निर्भर करेगा।
वहीं दूसरी ओर केमिकल और फार्मास्युटिकल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कुछ यूरोपीय कच्चे माल और इंटरमीडिएट प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लागत कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे घरेलू उत्पादन को भी फायदा होगा। खासकर फूड प्रोसेसिंग और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसका असर देखा जा सकता है।
हालांकि घरेलू उद्योगों की ओर से कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि सस्ते आयात से स्थानीय उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ सकता है। इस पर सरकार का तर्क है कि एफटीए में संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं और टैरिफ कटौती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
बताया जा रहा है कि एफटीए के पूर्ण प्रभाव दिखने में कुछ साल लग सकते हैं। लेकिन कुल मिलाकर माना जा रहा है कि भारत-EU व्यापार समझौते से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और संभावित रूप से कम कीमतों का लाभ मिल सकता है।
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