Header Image

राष्ट्रगान जन-गण-मन का इतिहास, अंग्रेजों से जुड़ा दावा कितना सच?

राष्ट्रगान जन-गण-मन का इतिहास, अंग्रेजों से जुड़ा दावा कितना सच?

Last Updated Jan - 24 - 2026, 05:20 PM | Source : Fela News

सोशल मीडिया पर बार-बार उठता सवाल- क्या भारत का राष्ट्रगान अंग्रेजी हुकूमत के लिए लिखा गया था? जानिए टैगोर का जवाब और पूरा ऐतिहासिक सच।
राष्ट्रगान जन-गण-मन का इतिहास
राष्ट्रगान जन-गण-मन का इतिहास

भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश की आत्मा, उसकी एकता और विविधता का प्रतीक है। जब भी यह धुन बजती है, तो हर भारतीय के मन में गर्व और सम्मान की भावना जाग उठती है। लेकिन इसके इतिहास को लेकर समय-समय पर एक सवाल सोशल मीडिया और बहसों में उछलता रहता है- क्या जन-गण-मन अंग्रेजों या ब्रिटिश सम्राट की प्रशंसा में लिखा गया था।

इस भ्रम की जड़ें साल 1911 से जुड़ी हैं। यह वही वर्ष था जब रवींद्रनाथ टैगोर ने जन-गण-मन की रचना की। मूल रूप से यह गीत बांग्ला भाषा में लिखा गया था और यह टैगोर की प्रसिद्ध रचना 'भारत भाग्य विधाता' का पहला पद है। 27 दिसंबर 1911 को इसे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया।

इसी अधिवेशन के आसपास ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम भारत आए थे। उनके स्वागत में स्कूली बच्चों द्वारा एक अलग गीत गाया गया था। यहीं से भ्रम की शुरुआत हुई। कुछ ब्रिटिश अखबारों ने गलत रिपोर्टिंग करते हुए यह छाप दिया कि कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया टैगोर का गीत सम्राट की स्तुति में था। धीरे-धीरे यही गलत जानकारी फैलती चली गई और दशकों बाद सोशल मीडिया के दौर में यह दावा और तेज हो गया।

हालांकि, इस सवाल का सबसे सटीक और स्पष्ट जवाब खुद रवींद्रनाथ टैगोर ने दिया था। साल 1937 में टैगोर ने एक पत्र लिखकर साफ कहा कि जन-गण-मन में जिस "अधिनायक" का उल्लेख है, वह कोई ब्रिटिश राजा नहीं, बल्कि वह परम सत्ता है जो युगों-युगों से भारत के भाग्य का मार्गदर्शन करती आई है। टैगोर ने स्पष्ट शब्दों में लिखा था कि किसी विदेशी शासक को भारत का भाग्य विधाता मानना उनके विचारों के बिल्कुल विपरीत है।

आजादी के बाद जब राष्ट्रगान को लेकर संविधान सभा में विचार हुआ, तो इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और टैगोर के स्पष्टीकरण को ध्यान में रखा गया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने जन-गण-मन को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रगान घोषित किया। इसी दिन 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यह स्पष्ट किया था कि दोनों को समान सम्मान मिलेगा।

राष्ट्रगान से जुड़े नियम भी समय के साथ तय किए गए। इसका पूरा संस्करण लगभग 52 सेकंड का होता है और इसे बजते समय सभी नागरिकों का खड़े होकर सम्मान देना उनका कर्तव्य है। राष्ट्रगान का अपमान करना कानूनन अपराध है और इसके लिए सजा का प्रावधान भी है।

निष्कर्ष साफ है। जन-गण-मन न तो अंग्रेजों की तारीफ में लिखा गया था और न ही किसी विदेशी शासक के सम्मान में। यह गीत भारत की आत्मा, उसकी चेतना और उसकी स्वतंत्र पहचान का प्रतीक है। इसे लेकर फैलाई जाने वाली अफवाहें इतिहास से ज्यादा गलतफहमी और अधूरी जानकारी पर आधारित हैं।

यह भी पढ़े 

Republic day 2026: गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट परंपरा कब शुरू, पहला विदेशी अतिथि कौन?

Share :

Trending this week

CJP चीफ का बयान वायरल

Jun - 12 - 2026

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के राज्यसभा सांसद स... Read More

TMC के 19 सांसदों ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी

Jun - 12 - 2026

ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की चर्चाओं के बीच सामने आई 19 ट... Read More

'370 रुपये बिरयानी' विवाद बढ़ा

Jun - 12 - 2026

370 Rupees Biryani Controversy:गुरुग्राम के चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ वि... Read More