Header Image

लोकसभा स्पीकर का पद कितना शक्तिशाली, जानें अधिकार और भूमिका

लोकसभा स्पीकर का पद कितना शक्तिशाली, जानें अधिकार और भूमिका

Last Updated Feb - 17 - 2026, 06:08 PM | Source : Fela News

लोकसभा स्पीकर संसद का सबसे प्रभावशाली पद माना जाता है. ओम बिरला के पास सदन संचालन, मनी बिल का फैसला और सांसदों पर कार्रवाई जैसे अहम संवैधानिक अधिकार हैं.
लोकसभा स्पीकर का पद कितना शक्तिशाली
लोकसभा स्पीकर का पद कितना शक्तिशाली

लोकसभा स्पीकर का पद भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली पदों में से एक माना जाता है. हाल ही में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा नो-कॉन्फिडेंस मोशन की चर्चा के बाद यह पद फिर सुर्खियों में आ गया है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि लोकसभा स्पीकर के पास कितनी ताकत होती है और यह पद संसद की कार्यप्रणाली में कितना निर्णायक रोल निभाता है.

लोकसभा स्पीकर का मुख्य काम सदन की कार्यवाही को संचालित करना होता है. जब संसद का सत्र चलता है, तो स्पीकर ही तय करते हैं कि कौन सदस्य कब और कितनी देर तक बोलेगा.

यदि सदन में हंगामा या अव्यवस्था होती है, तो स्पीकर के पास संबंधित सांसद को चेतावनी देने, नाम लेकर टोकने या गंभीर स्थिति में निलंबित करने का अधिकार भी होता है. इस तरह स्पीकर संसद में अनुशासन और संतुलन बनाए रखने की केंद्रीय भूमिका निभाते हैं.

स्पीकर की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक मनी बिल को लेकर फैसला करना है. भारतीय संविधान के अनुसार, कोई विधेयक मनी बिल है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय स्पीकर ही लेते हैं.

यह फैसला बेहद अहम होता है, क्योंकि मनी बिल पर राज्यसभा की शक्तियां सीमित हो जाती हैं और वह केवल सुझाव दे सकती है. स्पीकर का यह निर्णय अंतिम माना जाता है और इसे अदालत में भी चुनौती नहीं दी जा सकती.

इसके अलावा, स्पीकर के पास दलबदल कानून के तहत भी व्यापक अधिकार होते हैं. यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता खत्म करने का फैसला स्पीकर ही लेते हैं. यह शक्ति राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम मानी जाती है.

स्पीकर की भूमिका केवल सदन तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी काफी महत्वपूर्ण होती है. लोकसभा की विभिन्न संसदीय समितियां स्पीकर की देखरेख में काम करती हैं. स्पीकर इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में भी भूमिका निभाते हैं. साथ ही, लोकसभा सचिवालय भी स्पीकर के नियंत्रण में काम करता है, जिससे उन्हें प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं.

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सामान्य परिस्थितियों में स्पीकर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते. लेकिन यदि किसी मुद्दे पर वोटिंग बराबर हो जाती है, तो स्पीकर निर्णायक वोट दे सकते हैं. इस स्थिति में उनका वोट अंतिम फैसला तय करता है, जिससे उनकी भूमिका और भी प्रभावशाली हो जाती है.

भारत के आधिकारिक वरीयता क्रम में लोकसभा स्पीकर का स्थान छठे नंबर पर होता है, जो इस पद की प्रतिष्ठा और महत्व को दर्शाता है. ओम बिरला, जो वर्तमान में इस पद पर हैं, संविधान द्वारा दिए गए सभी विधायी, प्रशासनिक और अनुशासनात्मक अधिकारों का उपयोग करते हुए सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं.

कुल मिलाकर, लोकसभा स्पीकर का पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि बेहद शक्तिशाली और जिम्मेदारी भरा होता है. संसद की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने में स्पीकर की भूमिका निर्णायक मानी जाती है.

यह भी पढ़े 

तेज रफ्तार SUV का कहर, 23 वर्षीय साहिल की दर्दनाक मौत

Share :

Trending this week

बजट सत्र में सियासी संग्राम

Feb - 17 - 2026

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता और विप... Read More

लोकसभा स्पीकर का पद कितना शक्तिशाली

Feb - 17 - 2026

लोकसभा स्पीकर का पद भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण ... Read More

तेज रफ्तार SUV का कहर

Feb - 17 - 2026

दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए एक दर्दनाक हिट एंड रन हा... Read More