Last Updated Feb - 17 - 2026, 05:54 PM | Source : Fela News
दिल्ली के द्वारका में बिना लाइसेंस नाबालिग की SUV से 23 वर्षीय युवक की मौत हो गई. मां ने समय पर मदद न मिलने और आरोपी को जमानत मिलने पर सवाल उठाए.
दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए एक दर्दनाक हिट एंड रन हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. इस हादसे में 23 वर्षीय साहिल धनशेरा की जान चली गई, जब एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार SUV ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी. इस घटना ने सड़क सुरक्षा, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और जिम्मेदारी की कमी जैसे गंभीर सवालों को फिर से सामने ला दिया है. सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि घायल साहिल सड़क पर काफी देर तक मदद के इंतजार में तड़पता रहा, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका.
मृतक साहिल की मां इन्ना माकन ने बेटे की मौत का दर्द बयान करते हुए कहा कि उनका बेटा हादसे के बाद करीब 10 मिनट तक सड़क पर पड़ा रहा और मदद के लिए तड़पता रहा. उनका आरोप है कि आसपास मौजूद लोग और यहां तक कि एंबुलेंस भी समय पर सक्रिय नहीं हुई. जब परिवार को घटना की जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब तक साहिल की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके. मां का कहना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद उनके बेटे की जान बच सकती थी.
पुलिस जांच में सामने आया है कि हादसे के वक्त SUV एक नाबालिग चला रहा था, जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था. टक्कर इतनी तेज थी कि साहिल गंभीर रूप से घायल हो गया और SUV नियंत्रण खोकर पास खड़ी एक अन्य गाड़ी से भी टकरा गई. इस हादसे में एक अन्य वाहन चालक भी घायल हुआ. जांच के दौरान यह भी पता चला कि जिस SUV से हादसा हुआ, उस पर पहले से 13 ट्रैफिक चालान दर्ज थे, जिनमें ज्यादातर ओवरस्पीडिंग के मामले शामिल थे. इससे यह सवाल उठता है कि वाहन मालिक और चालक पहले से ही नियमों की अनदेखी करते रहे थे.
इस मामले में एक और विवादास्पद पहलू यह है कि आरोपी नाबालिग को बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देकर अंतरिम जमानत दे दी गई है. इस फैसले से पीड़ित परिवार और आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. साहिल के परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
यह हादसा केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा व्यवस्था और कानून के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति देना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना बेहद खतरनाक हो सकता है. इस घटना ने यह भी दिखाया है कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद तुरंत सहायता मिलना कितना जरूरी है.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है. वहीं, साहिल के परिवार की मांग है कि उन्हें न्याय मिले और दोषियों को ऐसी सजा दी जाए, जो समाज में एक कड़ा संदेश दे सके.
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