Last Updated Feb - 17 - 2026, 05:44 PM | Source : Fela News
जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के 20 दिन बाद कंपाउंडर पर FIR दर्ज हुई. SIT जांच में इंजेक्शन लापरवाही और विरोधाभासी बयानों के अहम सबूत मिले हैं.
राजस्थान के जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में आखिरकार बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है. घटना के करीब 20 दिन बाद बोरानाडा थाना पुलिस ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. यह कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत जांच और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर की गई है.
इस मामले में सामने आए तथ्यों ने इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही और प्रक्रियागत नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत किया है.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत 28 जनवरी को अचानक खराब हो गई थी. उन्हें सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत थी, जिसके बाद कंपाउंडर देवी सिंह ने उन्हें डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक जैसे इंजेक्शन लगाए.
जांच में सामने आया कि ये इंजेक्शन H-शेड्यूल श्रेणी में आते हैं, जिन्हें बिना किसी योग्य डॉक्टर की लिखित अनुमति के देना नियमों के खिलाफ है. यही नहीं, इन इंजेक्शनों के उपयोग और खरीद को लेकर आरोपी के बयान भी लगातार बदलते रहे, जिससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हो गया.
SIT ने पिछले 20 दिनों में मामले से जुड़े सभी प्रमुख लोगों से पूछताछ की, जिनमें साध्वी के परिजन, आश्रम के कर्मचारी और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल थे. जांच के दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने भी यह स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा बताए गए इंजेक्शन उसकी दुकान से नहीं खरीदे गए थे.
इस खुलासे ने आरोपी के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. इसके अलावा मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया कि इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती थी.
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लापरवाही से मृत्यु कारित करने से संबंधित है. यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के रूप में जानी जाती थी. इस प्रावधान के तहत यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु इलाज या किसी अन्य प्रक्रिया में लापरवाही के कारण होती है, तो आरोपी को दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल बोर्ड और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्षों ने मामले को स्पष्ट दिशा दी है और आरोपी की गिरफ्तारी कभी भी की जा सकती है. साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में अन्य कोई व्यक्ति भी जिम्मेदार है. दूसरी ओर, साध्वी के परिवार और अनुयायियों ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है और न्याय की उम्मीद जताई है.
यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि साध्वी प्रेम बाईसा धार्मिक और सामाजिक रूप से सम्मानित व्यक्तित्व मानी जाती थीं. पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी पर टिकी हुई है.
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