Last Updated Feb - 17 - 2026, 06:23 PM | Source : Fela News
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बयानबाजी हुई, जिससे राज्य की राजनीति में नया टकराव शुरू हो गया ।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी तनाव खुलकर सामने आ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कानून-व्यवस्था में सुधार का दावा किया, वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। इस बयानबाजी ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में कहा कि उत्तर प्रदेश अब पहले जैसा नहीं रहा, जहां गुंडा टैक्स और दंगों की घटनाएं आम थीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश "उत्सव प्रदेश" बन गया है और अब यहां न कर्फ्यू लगता है और न ही दंगे होते हैं। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए संकेत दिया कि पिछली सरकारों के समय अपराध और अराजकता का माहौल था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने योगी सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार जमीन पर मौजूद समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई मुद्दे अभी भी गंभीर बने हुए हैं और सरकार सिर्फ भाषणों के जरिए अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता असली स्थिति से वाकिफ है और सरकार के दावों को वास्तविकता से जोड़कर देख रही है।
अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सरकार को उपलब्धियों का दावा करने से पहले जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस जवाब देना चाहिए, न कि सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विधानसभा के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए । राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इस तरह की तीखी बयानबाजी आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। यह बयान न केवल वर्तमान राजनीतिक माहौल को दर्शाता है, बल्कि भविष्य की सियासी दिशा का भी संकेत देता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच यह टकराव कोई नया नहीं है, लेकिन बजट सत्र के दौरान इस तरह की सीधी प्रतिक्रिया ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयान सामने आने की संभावना है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहेगा। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार और विपक्ष अपने-अपने दावों और आरोपों को किस तरह साबित करते हैं और इसका असर राज्य की राजनीति पर कितना पड़ता है।
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