Last Updated Feb - 27 - 2026, 12:42 PM | Source : Fela News
अगर किसी नागरिक के पास आधार, पैन या पासपोर्ट नहीं है, तब भी उसकी नागरिकता खत्म नहीं होती। जानिए किन दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं से पहचान साबित की जा सकती है।
अक्सर यह मान लिया जाता है कि आधार कार्ड, पासपोर्ट या पैन कार्ड ही भारतीय नागरिकता के अंतिम प्रमाण हैं। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। भारत में नागरिकता का आधार इन दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत तय होती है। यानी अगर किसी व्यक्ति के पास ये तीनों दस्तावेज नहीं हैं, तब भी वह अपनी नागरिकता साबित कर सकता है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि पहचान का दस्तावेज है। पैन कार्ड आयकर से जुड़ा दस्तावेज है और पासपोर्ट यात्रा के लिए जारी किया जाता है। हालांकि पासपोर्ट नागरिकता का संकेत देता है, लेकिन इसके अभाव में नागरिकता समाप्त नहीं होती।
नागरिकता किन आधारों पर मिलती है?
भारतीय कानून के अनुसार नागरिकता इन आधारों पर दी जाती है:
• जन्म के आधार पर
• माता-पिता की नागरिकता के आधार पर
• पंजीकरण के माध्यम से
• प्राकृतिककरण (लंबे समय तक भारत में निवास )
अगर कोई व्यक्ति भारत में जन्मा है और उसके माता-पिता भारतीय नागरिक हैं, तो वह स्वतः भारतीय नागरिक माना जाता है। ऐसे में आधार या पैन का होना जरूरी शर्त नहीं है।
अगर किसी व्यक्ति के पास आधार, पैन या पासपोर्ट नहीं है, तो वह अन्य दस्तावेजों की मदद से अपनी नागरिकता साबित कर सकता है। उदाहरण के लिए जन्म प्रमाण पत्र एक मजबूत कानूनी दस्तावेज है। इसके अलावा स्कूल या कॉलेज के दाखिले के रिकॉर्ड, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, बिजली-पानी के बिल, जमीन या मकान की रजिस्ट्री के कागजात भी पहचान और निवास का प्रमाण माने जाते हैं।
कई मामलों में सरकारी नौकरी से जुड़े दस्तावेज या पेंशन रिकॉर्ड भी नागरिकता साबित करने में सहायक होते हैं। यह साबित करना जरूरी होता है कि व्यक्ति भारत में जन्मा या लंबे समय से यहां निवास कर रहा है।
अगर कोई दस्तावेज उपलब्ध न हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन मदद कर सकता है।
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• तहसील या जिला प्रशासन से निवास प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।
• ग्राम पंचायत या नगर निगम से प्रमाण पत्र लिया जा सकता है।
• पुराने स्कूल रजिस्टर या अस्पताल के रिकॉर्ड भी उपयोगी हो सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर गवाहों की गवाही भी दर्ज की जा सकती है। अदालत या जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेती है।
सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की समय सीमा भी समाप्त कर दी है। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाया था, तो वह अब भी इसे बनवा सकता है। यह दस्तावेज नागरिकता के मामलों में अहम
भूमिका निभाता है।
भारतीय नागरिकता केवल एक कार्ड पर निर्भर नहीं करती। यह कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध प्रमाणों पर आधारित होती है। दस्तावेजों की कमी का मतलब नागरिकता खत्म होना नहीं है, बल्कि सही प्रक्रिया के जरिए इसे साबित किया जा सकता है।
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