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स्मार्ट सिटी का मजाक! बिहारशरीफ में 40 लाख की घड़ी एक दिन में बंद, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

स्मार्ट सिटी का मजाक! बिहारशरीफ में 40 लाख की घड़ी एक दिन में बंद, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Last Updated Apr - 09 - 2025, 01:39 PM | Source : Fela News

एक दिन में 'बंद' हुआ विकास का प्रतीक, जनता का भरोसा भी साथ गया
स्मार्ट सिटी का मजाक! बिहारशरीफ में 40 लाख की घड़ी एक दिन में बंद, सोशल मीडिया पर उठे सवाल
स्मार्ट सिटी का मजाक! बिहारशरीफ में 40 लाख की घड़ी एक दिन में बंद, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

बिहार शरीफ में हाल ही में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बने क्लॉक टॉवर ने जैसे ही काम शुरू किया, अगले ही दिन बंद हो गया। 40 लाख की लागत से बने इस क्लॉक टॉवर को मुख्यमंत्री की 'प्रगति यात्रा' से ठीक पहले शुरू किया गया था, लेकिन इसकी उम्र महज 24 घंटे ही रही। अब यह टॉवर सोशल मीडिया पर मज़ाक और गुस्से का केंद्र बन चुका है।

घड़ी बंद, भरोसा भी ठप: उद्घाटन के एक दिन बाद ही तकनीकी फेल

40 लाख में बनी घड़ी बंद, लोगों ने कहा—समय की नहीं, सिस्टम की घड़ी खराब है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, घड़ी के बंद होने का मुख्य कारण इसके अंदर की तांबे की वायरिंग का चोरी हो जाना है। इस वायर चोरी के कारण पूरी घड़ी सिस्टम ठप पड़ गया। लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी घड़ी का बंद होना, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।

सोशल मीडिया पर नाराज़गी, लोगों ने कहा—'स्मार्ट सिटी या स्मार्ट मज़ाक?'

X (पूर्व में ट्विटर) पर मचा बवाल, यूज़र्स ने कहा—ये क्लॉक टॉवर नहीं, सरकारी बेपरवाही का प्रतीक है।

यूज़र्स ने क्लॉक टॉवर की बनावट, पेंटिंग और फिनिशिंग को लेकर भी नाखुशी जताई। किसी ने इसे “प्लेन जेन” बताया तो किसी ने लिखा कि “स्मार्ट सिटी का ये नमूना देख विदेशी मेहमान भी शरमा जाएं।” तुलना देश के दूसरे क्लॉक टॉवर्स से भी की गई और पूछा गया कि क्या ₹40 लाख का यही स्तर है?

सवाल प्रशासन से: क्या जल्दबाज़ी में बना टॉवर सिर्फ दिखावे का था?

CM की यात्रा से पहले प्रोजेक्ट पूरा करने की हड़बड़ी में गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया?

बताया जा रहा है कि घड़ी को मुख्यमंत्री की यात्रा के पहले ही चालू करवाने के लिए जल्दबाज़ी में ऑपरेशन शुरू किया गया था। लेकिन क्या बिना जांच-पड़ताल के सिर्फ “रिबन कटिंग” के लिए सार्वजनिक परियोजनाएं शुरू करना सही है?

विकास की तस्वीर या दिखावे की दीवार?

स्मार्ट सिटी के नाम पर अगर सिर्फ सतही ढांचा तैयार हो रहा है तो ये जनता की उम्मीदों और टैक्स के पैसे दोनों का अपमान है।

बिहार शरीफ के इस क्लॉक टॉवर ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई हम स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहे हैं या सिर्फ कागज़ी विकास में उलझे हुए हैं? जनता अब सोशल मीडिया के ज़रिए अपना गुस्सा जाहिर कर रही है, लेकिन क्या प्रशासन भी उतनी ही गंभीरता से इन सवालों का जवाब देगा?
 

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