Last Updated Apr - 27 - 2026, 11:44 AM | Source : Fela News
Arvind Kejriwal News:अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर भरोसा टूटने की बात कहते हुए बड़ा ऐलान किया है। केजरीवाल बोले- अब न खुद पेश होंगे, न वकील भेजेंगे, गांधीजी के सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक दांव चल दिया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लिखी चिट्ठी में केजरीवाल ने साफ कहा है कि अब उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वह न खुद कोर्ट में पेश होंगे और न ही किसी वकील को भेजेंगे।
'गांधी के सत्याग्रह' का हवाला देकर सुनाया फैसला
अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह निर्णय लिया है। उनका कहना है कि अब वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर से आने वाले किसी भी फैसले को चुनौती देने का अधिकार वह Supreme Court of India में सुरक्षित रखेंगे।
आखिर क्यों टूटा भरोसा?
दरअसल 20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें केजरीवाल और अन्य नेताओं ने उनसे आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की थी। अदालत ने कहा था कि केवल आशंका या पूर्वाग्रह के डर के आधार पर कोई जज खुद को मामले से अलग नहीं कर सकता और बिना ठोस सबूत न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
जज पर लगाए थे गंभीर आरोप
इससे पहले अरविंद केजरीवाल खुद अदालत में वकील की तरह पेश हुए थे और जस्टिस स्वर्ण कांता पर निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि जज कथित तौर पर आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल रही हैं, जिससे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह है। इसी विवाद के बाद अब केजरीवाल का यह पत्र सियासी गलियारों से लेकर न्यायिक हलकों तक बड़ी बहस छेड़ रहा है।
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