Last Updated May - 18 - 2026, 03:49 PM | Source : Fela News
दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल-सिसोदिया केस पर कल बड़ी सुनवाई, CBI की याचिका पर जस्टिस मनोज जैन की बेंच करेगी सुनवाई, वहीं अवमानना मामले की सुनवाई दूसरी बेंच के सामने होगी.
दिल्ली हाई कोर्ट में आबकारी नीति केस को लेकर सोमवार को बड़ी सुनवाई होने जा रही है. सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली राहत को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है. अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की बेंच करेगी. इससे पहले यह केस जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रहा था, लेकिन उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था.
दरअसल, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने इस केस की सुनवाई नहीं करने का फैसला लिया. अब इस पूरे मामले पर 19 मई को नई बेंच के सामने सुनवाई होगी.
दूसरी तरफ, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई अलग बेंच करेगी. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुडेजा की बेंच इस मामले को सुनेगी. यह सुनवाई भी सोमवार को ही तय की गई है.
20 अप्रैल को खारिज हुई थी मांग
इससे पहले अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी. हालांकि, 20 अप्रैल को अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया था.
अपने आदेश में जस्टिस शर्मा ने कहा था कि किसी भी राजनेता को न्यायपालिका के खिलाफ अविश्वास का माहौल बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. उन्होंने यह भी कहा कि जज को हटाने की मांग करना न्याय व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने जैसा है.
सोशल मीडिया पोस्ट बने विवाद की वजह
अदालत के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर जस्टिस शर्मा के खिलाफ कई पोस्ट वायरल हुए. इसी को आधार बनाकर अदालत ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की. कोर्ट ने उन पत्रों का भी संज्ञान लिया, जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने की बात कही थी.
इसके अलावा, कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल के उस वीडियो को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा की अदालत में सुनवाई का बहिष्कार करने की वजह सार्वजनिक रूप से बताई थी.
अब सोमवार की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला दिल्ली की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
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