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सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर पर ममता बनर्जी की दलील

सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर पर ममता बनर्जी की दलील

Last Updated Feb - 04 - 2026, 04:28 PM | Source : Fela News

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। राज्य सरकार और केंद्र की दलीलों के बीच प्रक्रिया की वैधता और प्रभाव पर बहस हो रही है
सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर पर ममता बनर्जी की दलील
सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर पर ममता बनर्जी की दलील

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष को रखते हुए वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में “मिसमैच” को “मिसमैप” किया जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि प्रक्रिया के दौरान डेटा से जुड़े अंतर को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से दलील दी गई कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना बताया जा रहा है, लेकिन व्यवहार में यह प्रक्रिया कई वैध मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है। वकीलों ने कहा कि आधार, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों के मिलान में सामने आ रहे छोटे अंतर को गंभीर त्रुटि के रूप में दिखाया जा रहा है। इसी आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह प्रक्रिया निष्पक्ष और संवैधानिक दायरे में की जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि एसआईआर का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक और अद्यतन रहे। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार चल रही है और किसी भी नागरिक के वैध अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा रहा। अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में विसंगतियां सामने आती हैं, वहां संबंधित व्यक्ति को स्पष्टीकरण और सुधार का अवसर दिया जाता है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि मतदाता सूची जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पारदर्शिता और संतुलन बेहद आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार, अदालत यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या एसआईआर के दौरान अपनाई जा रही पद्धति से किसी विशेष वर्ग या क्षेत्र के मतदाताओं पर असमान प्रभाव पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत निर्वाचन आयोग से विस्तृत प्रक्रिया और आंकड़ों से जुड़ी जानकारी मांग सकती है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और मामले की सुनवाई जारी है। प्रशासन का कहना है कि अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़े वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी 

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