Last Updated Feb - 11 - 2026, 01:48 PM | Source : Fela News
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद जारी नक्शे में PoK और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया. विवाद बढ़ते ही अमेरिका ने पोस्ट हटाकर नया संकेत दिया.
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के दफ्तर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत की सीमा के भीतर दिखाया गया था। यह पोस्ट सामने आते ही चर्चा का विषय बन गया। हालांकि कुछ ही दिनों बाद अमेरिका ने वह पोस्ट हटा दी, जिससे इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
यह नक्शा उस समय साझा किया गया था जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा था। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया, जिसे एशियाई देशों में सबसे कम दर बताया गया। ऐसे समय में नक्शे का यह प्रस्तुतीकरण कई लोगों को भारत के प्रति अमेरिका के बदले रुख का संकेत लगा। लेकिन पोस्ट हटाए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला इतना सीधा नहीं है।
दरअसल, अमेरिका परंपरागत रूप से जम्मू-कश्मीर के विवादित हिस्सों को अलग रंग या रेखा से दर्शाता रहा है, ताकि पाकिस्तान के दावे को ध्यान में रखा जा सके। वहीं अक्साई चिन को लेकर भी अमेरिका ने आमतौर पर तटस्थ रुख अपनाया है। लेकिन इस बार जारी नक्शे में न तो कोई अलग सीमा रेखा थी और न ही विवादित क्षेत्रों को अलग से चिन्हित किया गया था। यही वजह रही कि कूटनीतिक हलकों में इसे एक संभावित 'पॉलिसी शिफ्ट' के तौर पर देखा जाने लगा ।
हालांकि अमेरिकी दफ्तर ने आधिकारिक रूप से इस बदलाव या पोस्ट हटाने की वजह स्पष्ट नहीं की है। पोस्ट को एक्स (पूर्व ट्विटर अकाउंट से चुपचाप हटा दिया गया, जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि संभवतः पाकिस्तान या चीन की ओर से आपत्ति जताई गई हो, या फिर इसे तकनीकी त्रुटि मानकर सुधारा गया हो।
भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र उसका अभिन्न हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा गलत नक्शा दिखाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे में इस नक्शे को भारत के आधिकारिक रुख के अनुरूप माना जा रहा था। लेकिन अमेरिका का यू-टर्न इस बात का संकेत भी देता है कि वॉशिंगटन अभी भी इन संवेदनशील मुद्दों पर संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
ट्रेड डील के संदर्भ में देखें तो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का नया अध्याय खुलता दिखाई दे रहा है। ऊर्जा, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यापार बढ़ाने की बात कही गई है। ऐसे में नक्शा विवाद ने कुछ समय के लिए ध्यान जरूर खींचा, लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसे बड़ा मुद्दा नहीं बनने दिया गया।
फिलहाल यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नक्शा भी कितना संवेदनशील हो सकता है। ट्रेड डील की गर्मजोशी के बीच उठा यह विवाद भले शांत हो गया हो, लेकिन इसने दिखा दिया कि सीमाओं का सवाल आज भी वैश्विक राजनीति में बेहद अहम और संवेदनशील है।
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