Last Updated Feb - 26 - 2026, 02:58 PM | Source : Fela News
बसपा प्रमुख मायावती ने कांशीराम जयंती और जिला नामकरण को लेकर सपा व अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। बयान से यूपी की सियासत में हलचल तेज।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है।
कांशीराम जयंती के मुद्दे पर सपा द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाने के दावों के बीच मायावती की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखते हुए सपा के "चाल, चरित्र और चेहरा" पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का इतिहास दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज के प्रति विरोधी रवैये से भरा रहा है।
उनके मुताबिक, कांशीराम जयंती के नाम पर सपा द्वारा "पीडीए दिवस' मनाने की घोषणा महज राजनीतिक नाटकबाज़ी है और इसका उद्देश्य बहुजन समाज के वोटों को साधना है।
बसपा प्रमुख ने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन और 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में दलितों पर अत्याचार रोकने की शर्तों के बावजूद तत्कालीन सरकार ने रवैया नहीं बदला, जिसके बाद बसपा को समर्थन वापस लेना पड़ा। उन्होंने गेस्ट हाउस कांड को इतिहास में दर्ज "काली क्रूरता" बताया।
अखिलेश यादव का नाम लेते हुए मायावती ने कहा कि जब बसपा सरकार ने कासगंज को "कांशीराम नगर' के रूप में नया जिला बनाया, तो सपा सरकार बनने के बाद उसका नाम बदल दिया गया। उन्होंने इसे बहुजन समाज के साथ विश्वासघात बताया।
इसी तरह, संत रविदास नगर और कांशीराम के नाम पर बने अन्य संस्थानों के नाम बदलने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा सरकारों का रवैया मुस्लिम समाज के प्रति भी संतोषजनक नहीं रहा और दंगों के दौरान जान-माल की हानि हुई। उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा की राजनीति एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने वाली रही है, जिससे प्रदेश की जनता प्रभावित हुई है।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। बहुजन वोट बैंक को साधने की कोशिशों के बीच बसपा अपने मूल एजेंडे और विरासत को फिर से केंद्र में लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
फिलहाल सपा की ओर से इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि इस तीखे हमले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।
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