Last Updated Feb - 27 - 2026, 11:05 AM | Source : Fela News
दिल्ली मेट्रो के एक कोच में धक्के को लेकर दो महिलाओं के बीच मारपीट हो गई। वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल है, जहां एक बुजुर्ग महिला बीच-बचाव करती दिखीं।
दिल्ली मेट्रो एक बार फिर विवाद की वजह से सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियों में मेट्रो के अंदर दो महिलाएं आपस में बुरी तरह उलझती दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत भीड के दौरान लगे एक छोटे से धक्के से हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह बहस हिंसक झगड़े में बदल गई।
वीडियों में देखा जा सकता है कि मेट्री के कोध के भीतर पहले दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होती है। आवाजें ऊंची होती जाती हैं और माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। अचानक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है और दोनों महिलाएं एक-दूसरे को धक्का देने लगती है। देखते ही देखते एक महिला दूसरी को पकड़कर नीचे गिरा देती है। नीचे गिरी महिला भी पीछे नहीं हटती और सामने वाली के बाल खींचते हुए पलटाकर करती है। कोच के फर्श पर दोनों के बीच कुछ सेकंड तक जोरदार हाथापाई चलती रहती है।
इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आसपास मौजूद अधिकांश यात्री सुभाष तमाशा देखते रहे। कुछ लोग मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड करते दिखाई देते हैं, जबकि बहुत कम लोग इगह शांत कराने की कोशिश करते हैं। थोड़ी देर बाद एक बुजुर्ग महिला आगे आई और सख्त लहजे में दोनों को अलग करने की कोशिश करती है। उनके हस्तक्षेप के बाद स्थिति कुछ हद तक संभलती नजर आती है।
यह वीडियो माडको निग प्लेटफॉर्म एक्स पर मशहूर अकाउंट @gharkekalesh द्वारा शेयर किया गया है। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि या सटीक तारीख और स्थान की जानकारी स्पष्ट नहीं है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की ओर से फिल्हाल इस मामले पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
सार्वजनिक परिवहन में इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। दिल्ली मेट्री रोजाना लाखों यात्रियों को सफर की सुविधा देती है। पीक आवर्स में भीड़ के कारण धक्का लगना आम बात है। लेकिन छोटी-सी असुविधा को लेकर हिंसक प्रतिक्रिया देना न केवल भाजून व्यवस्था के लिहाज से गलत है, बल्कि सामाजिक शिष्टाचार के भी खिलाफ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर धैर्य और संयम बेहद जरूरी है। ऐसी घटनाएं न केवल यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावित बनाती है, बल्कि बच्चों और बुजुों के लिए भी असहज माहौल पैदा करती है। इसके अला मैट्रो जैसे साझा परिवयान साधनों में अनुशासन बना रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
पिछले कुछ समय में मेट्रों के अंदर लड़ाई ड्रागडे और वायरल रील्स के कई कई वीडियो सामने आ चुके हैं। हर बार यह सवाल उठत्व है कि क्या लोग सोशल मीडिया पर ध्यान पाने के लिए सीमाएं बंध रहे हैं, या फिर सार्वजनिक जीवन में सहनशीलता घटती जा रही है।
यह घटना एक बार किन याद दिलाती है कि छोटी-सी बहस की अगर समय रहते शांत न किया जाए, तो यह बाहे विवाद का रूम ले सकती है। मेट्रो प्रशासन और यात्रियों दोनों को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क और जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा।
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