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NDA बनाम महागठबंधन, 9 सीटों पर प्रतिष्ठा की लड़ाई

NDA बनाम महागठबंधन, 9 सीटों पर प्रतिष्ठा की लड़ाई

Last Updated Feb - 24 - 2026, 10:42 AM | Source : Fela News

राज्यसभा के बाद अब बिहार विधान परिषद् की 9 सीटों पर सियासी संग्राम तेज होगा। जून और नवंबर में कुल 17 सीटों के चुनाव से NDA और महागठबंधन की ताकत तय होगी।
NDA बनाम महागठबंधन
NDA बनाम महागठबंधन

बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद अब अगली बड़ी जंग विधान परिषद् की सीटों को लेकर छिड़ने वाली है। वर्ष 2026 में कुल 17 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 9 सीटों पर जून में और 8 सीटों पर नवंबर में चुनाव होना है। ऐसे में सियासी गलियारों में अभी से रणनीति और समीकरणों का दौर शुरू हो गया है। खासतौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) के बीच मुकाबला रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं। 

28 जून 2026 को जिन 9 सीटों का कार्यकाल समाप्त होगा, उनमें राष्ट्रीय जनता दल की 2, जनता दल (यू) की 3, भारतीय जनता पार्टी की 1 और कांग्रेस की 1 सीट शामिल है। इसके अलावा 2 सीटें पहले से रिक्त बताई जा रही हैं। 

राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद इन सीटों को लेकर दलों के भीतर मंथन तेज हो जाएगा। माना जा रहा है कि जिन सहयोगी दलों को राज्यसभा में समायोजित नहीं किया जा सकेगा, उन्हें विधान परिषद् के जरिए संतुष्ट करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। 

जून में खाली होने वाली सीटों में राजद के मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह, जदयू के गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, बीजेपी के संजय मयूख और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का नाम शामिल है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर दलों के भीतर भी खींचतान हो सकती है, क्योंकि विधान परिषद् के जरिए कई नेताओं को सरकार या संगठन में भूमिका दी जाती है। 

नवंबर 2026 में 8 और सीटें खाली होंगी। इनमें 4 स्नातक कोटे और 4 शिक्षक कोटे की सीटें शामिल हैं। इस चरण में बीजेपी, जदयू, कांग्रेस, जनसुराज, सीपीआई और निर्दलीय सदस्यों की सीटें दांव पर रहेंगी। नवंबर की सीटों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इन पर शिक्षित वर्ग और शिक्षक समुदाय का सीधा प्रभाव रहता है, जो राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जाता है। 

वर्तमान संख्या बल पर नजर डालें तो विधान परिषद् में बीजेपी 22 सीटों के साथ सबसे आगे है, जबकि जदयू के पास 19 और राजद के पास 16 सदस्य हैं। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एमएल) समेत अन्य दलों और निर्दलीयों की भी मौजूदगी संतुलन को प्रभावित करती है। ऐसे में आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि उच्च सदन में किस गठबंधन की पकड़ मजबूत होगी । 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कुछ सीटों को लेकर पहले से ही समझौते और वादे किए गए हैं। कुछ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिन्हें गठबंधन संतुलन साधने के लिए मौका दिया जा सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही साफ होगी। 

कुल मिलाकर, राज्यसभा के बाद विधान परिषद् की 9 सीटों का चुनाव बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकता है। जून और नवंबर के दोनों चरण NDA और महागठबंधन के लिए शक्ति परीक्षण साबित होंगे। अब देखना यह है कि रणनीति, संख्या बल और गठबंधन की मजबूती में कौन किस पर भारी पड़ता है। 

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